আবহাওয়া আইপিএল-2025 টাকা পয়সা পশ্চিমবঙ্গ ভারত ব্যবসা চাকরি রাশিফল স্বাস্থ্য প্রযুক্তি লাইফস্টাইল শেয়ার বাজার মিউচুয়াল ফান্ড আধ্যাত্মিক অন্যান্য
---Advertisement---

दर्जनों चक्कर के बाद नहीं बन रहे प्रमाण पत्र, त्रस्त छात्रा ने लिखा- नहीं चाहिए छात्रवृत्ति

Published on: October 31, 2021
---Advertisement---

पिथौरा. स्कूली बच्ची ने आवश्यक प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसील कार्यालय के दर्जनों चक्कर लगाने और मिलने वाली छात्रवृत्ति से अधिक खर्च के कारण स्कूल के प्राचार्य को लिखा- हमें छात्रवृति नहीं चाहिए. क्षेत्र के पालकों एवं किसानों को आय, निवास एवं जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. जेब पर मार सो अलग बाद भी प्रमाण पत्र समय पर बन भी नहीं पा रहा. कभी अफसर नहीं, तो कभी सर्वर डाउन और बिजली का आना-जाना तो चलता ही रहता है. इस प्रतिनिधि ने ग्रामीणों की शिकायत पर तहसील कार्यालय और लोकसेवा केंद्र की पड़ताल की. प्रमाण पत्र बनवाने आए लोगों से बात भी की. पड़ताल से पता चला कि आय, निवास एवं जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पालकों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है.

http://महंगाई की मार जारी, पेट्रोल-डीजल के दामों में फिर बढ़ोतरी

पिथौरा राजस्व विभाग द्वारा विद्यार्थियों एवं किसानों द्वारा बनवाए जाने वाले आय, निवास एवं जाति प्रमाण पत्र बनाने में चल रही भर्राशाही, अत्यधिक देरी और खर्च के कारण विद्यार्थी-पालक स्कॉलरशिप (छात्रवृति) लेने से भी साफ इंकार करने लगे हैं. अनुमान लगा लें कितने परेशान रहे होंगे विद्यार्थी-पालक. पालकों ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा कि स्थानीय तहसील कार्यालय में एक प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर 300-1000 रुपए तक वसूले जा रहे हैं. वहीं इस प्रतिनिधि को एक स्कूल के प्राचार्य ने इस संबंध में विद्यार्थी-पालक का लिखा पत्र भी दिखाया. जिसमें विद्यार्थी-पालक ने लिखा है- हमें छात्रवृति नहीं चाहिए. इस संबंध में जब तहसीलदार का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तब पता चला कि यहां विगत पखवाड़े भर से तहसीलदार नहीं है. वहीं अनुविभागीय अधिकारी ने इस प्रतिनिधि का मोबाइल ही रिसीव नहीं किया. न ही मैसेज का जवाब दिया.

तहसील कार्यालय में प्रमाण पत्र के लिए जद्दोजहद में हितग्राही टूटने लगे हैं. भर्राशाही, अत्यधिक देरी और खर्च से उनका सब्र टूट रहा है पर कई इसलिए चुप रहते हैं कि प्रमाण पत्र किसी तरह मिल जाए कहीं अपने बच्चे का अहित न हो. इधर, तहसीलदार के मातहत कर्मियों ने बताया कि विगत पखवाड़े भर पूर्व यहां पदस्थ एक नायब तहसीलदार आरके दीवान की पदोन्नति में अन्यंत्र जाने के बाद श्री नेताम तहसीलदार को प्रभार सौंपा गया था पर उनके कभी-कभार ही बैठने के कारण प्रमाण पत्रों का काम पेंडिंग होने लगा है. इसका फायदा स्थानीय कुछ दलाल उठाने लगे और खास लोगों के प्रमाण पत्र तो आसानी से बनने लगे पर आम लोगों के लिए प्रमाण पत्र बनवाना किसी बड़ी फतह जैसा हो गया है.

https://हाथी के हमले से 30वीं मौत, बुजुर्ग को पटककर मार डाला

इस प्रतिनिधि को भी ग्राम पाटनदादर की एक छात्रा के पिता ने बताया कि उनकी बेटी रायपुर के एक स्कूल में पढ़ रही है जिसके लिए अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र की जरुरत है पर तहसील कार्यालय में ‘ऑफिस-ऑफिस’ का खेल चल रहा है. कभी लोक सेवा केंद्र से भुइयां फिर भुइयां से लोकसेवा केंद्र, 4 माह से यह खेल जारी है पर अब तक काम बना नहीं. इस पूरे मामले में चूक-गलती किसकी है इसे समझने की आवश्यकता है. पालक ने बताया कि उनकी बड़ी बेटी का प्रमाण पत्र बन गया पर अब इसका इस तरह अटका या अटकाया जा रहा है कि पालक अब अपना सिर फोड़ लें. इस संबंध में भुइयां प्रभारी गोविंद पटेल ने बताया कि उनके पास लोक सेवा केंद्र से अधूरे दस्तावेज भेजे गए हैं. इधर, लोक सेवा केंद्र से पता लगाने पर केंद्र प्रभारी ने अपनी खामी छिपाने के लिए नेट को ही दोषी ठहरा दिया. प्रभारी के अनुसार उन्होंने हितग्राही छात्रा के समस्त दस्तावेज भुइयां में भेजे हैं पर भुइयां पहुंचते-पहुंचते अधूरे कैसे हो गए इस पर उन्होंने नेट स्लो की बात कही. उक्त मामले में मजबूर परेशान हितग्राहियों के संबंध में जानकारी देने एसडीएम से मोबाइल पर बात करने का प्रयास किया गया पर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया. बाद मैसेज भेजकर भी मामले के बारे में जानकारी देने का प्रयास किया गया पर इसका भी जवाब उन्होंने नहीं दिया.
जुड़िए हमसे….
https://www.facebook.com
https://cgjanadesh.com
https://cgjanadesh.com/category
8871342716

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now