पिथौरा. स्कूली बच्ची ने आवश्यक प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसील कार्यालय के दर्जनों चक्कर लगाने और मिलने वाली छात्रवृत्ति से अधिक खर्च के कारण स्कूल के प्राचार्य को लिखा- हमें छात्रवृति नहीं चाहिए. क्षेत्र के पालकों एवं किसानों को आय, निवास एवं जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. जेब पर मार सो अलग बाद भी प्रमाण पत्र समय पर बन भी नहीं पा रहा. कभी अफसर नहीं, तो कभी सर्वर डाउन और बिजली का आना-जाना तो चलता ही रहता है. इस प्रतिनिधि ने ग्रामीणों की शिकायत पर तहसील कार्यालय और लोकसेवा केंद्र की पड़ताल की. प्रमाण पत्र बनवाने आए लोगों से बात भी की. पड़ताल से पता चला कि आय, निवास एवं जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पालकों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है.
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पिथौरा राजस्व विभाग द्वारा विद्यार्थियों एवं किसानों द्वारा बनवाए जाने वाले आय, निवास एवं जाति प्रमाण पत्र बनाने में चल रही भर्राशाही, अत्यधिक देरी और खर्च के कारण विद्यार्थी-पालक स्कॉलरशिप (छात्रवृति) लेने से भी साफ इंकार करने लगे हैं. अनुमान लगा लें कितने परेशान रहे होंगे विद्यार्थी-पालक. पालकों ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा कि स्थानीय तहसील कार्यालय में एक प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर 300-1000 रुपए तक वसूले जा रहे हैं. वहीं इस प्रतिनिधि को एक स्कूल के प्राचार्य ने इस संबंध में विद्यार्थी-पालक का लिखा पत्र भी दिखाया. जिसमें विद्यार्थी-पालक ने लिखा है- हमें छात्रवृति नहीं चाहिए. इस संबंध में जब तहसीलदार का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तब पता चला कि यहां विगत पखवाड़े भर से तहसीलदार नहीं है. वहीं अनुविभागीय अधिकारी ने इस प्रतिनिधि का मोबाइल ही रिसीव नहीं किया. न ही मैसेज का जवाब दिया.
तहसील कार्यालय में प्रमाण पत्र के लिए जद्दोजहद में हितग्राही टूटने लगे हैं. भर्राशाही, अत्यधिक देरी और खर्च से उनका सब्र टूट रहा है पर कई इसलिए चुप रहते हैं कि प्रमाण पत्र किसी तरह मिल जाए कहीं अपने बच्चे का अहित न हो. इधर, तहसीलदार के मातहत कर्मियों ने बताया कि विगत पखवाड़े भर पूर्व यहां पदस्थ एक नायब तहसीलदार आरके दीवान की पदोन्नति में अन्यंत्र जाने के बाद श्री नेताम तहसीलदार को प्रभार सौंपा गया था पर उनके कभी-कभार ही बैठने के कारण प्रमाण पत्रों का काम पेंडिंग होने लगा है. इसका फायदा स्थानीय कुछ दलाल उठाने लगे और खास लोगों के प्रमाण पत्र तो आसानी से बनने लगे पर आम लोगों के लिए प्रमाण पत्र बनवाना किसी बड़ी फतह जैसा हो गया है.
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