नई दिल्ली. सेवानिवृत्त दंपती जिस छोटी सी बात को लेकर अलग हुए, उसी को सुलह का आधार बनाकर कोर्ट ने उनकी 17 साल की दूरी मिटा दी. दरअसल, मध्यप्रदेश के देवास के रहने वाले एक व्यक्ति बैंक प्रेस नोट पद से सेवानिवृत्त हुए थे. वर्तमान में उनकी उम्र 79 और उनकी पत्नी 72 साल की है. सेवानिवृत्ति का जो पैसा मिला उसे उन्होंने पत्नी को सौंप दिया. देवास स्थित मकान भी पत्नी के नाम कर दिया. उनकी सहमति की वजह से पेंशन भी पत्नी के खाते में आती थी. सेवानिवृत्ति के दो साल बाद उन्होंने पत्नी के सामने सेव की सब्जी खाने की इच्छा जताई तो पत्नी ने कहा सेव लाकर दो. पति ने जब पत्नी से पैसे मांगे तो उन्होंने कहा कि जब नौकरी में थे तब तो लाते थे. जिसपर पति ने कहा कि सबकुछ तुम्हे सौंप दिया है.
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अब मेरे पास पैसा कहां है. पत्नी ने सेव की सब्जी नहीं बनाई. जिसके बाद गुस्साए पति अगले दिन बिना बताए घर से चले गए और महाराष्ट्र के बुलढाना के मातोड़ गांव में झोपड़ी बनाकर रहने लगे. पति ने जब अपने खाते में पेंशन का पैसा मंगाना शुरू किया तो पत्नी अदालत पहुंच गई. न्यायधीश ने पति और पत्नी से अलग-अलग बात की. जिसके बाद दोनों को अदालत में बुलाया. न्यायाधीश ने स्टाफ से सेव का पैकेट मंगवाया और पत्नी से पति के लिए सब्जी बनाने को कहा. दोनों साथ में घर गए और पत्नी ने सब्जी बनाकर खिलाई. अगले दिन दोनों अदालत आए तो कहा कि हम साथ रहने को तैयार हैं लेकिन कैसे माना जाए कि यह अब ठीक रहेगी. ये साईं बाबा के सामने कसम खाए तो मान लूंगा. जिसपर न्यायाधीश ने दोनों की आर्थिक मदद का इंतजाम करते हुए उन्हें शिरडी भेजा. वहां से लौटने पर 26 नवंबर को दोनों ने राजीनामा कर लिया.
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