रायपुर. प्रदेश के चर्चित 1000 एकड़ से अधिक जमीन घोटाले की जांच अब भी लंबित है. ज्ञात हो कि 11 अगस्त 2019 को पिथौरा एसडीएम एवं एसडीओपी की दो सदस्यीय टीम द्वारा जांच कर एक माह के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के आदेश तात्कालिन कलेक्टर ने दिए थे. पर दो वर्ष बाद भी उक्त जमीन घोटाले की फाइल अब भी जस की तस है. जानकारी के अनुसार पिथौरा निवासी पत्रकार डॉ. लालबहादुर महंती ने विगत 3 जुलाई 2018 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से महासमुंद जिले के पिथौरा क्षेत्र में करीब 1000 एकड़ से अधिक शासकीय भूमि को कूट रचना कर बेच देने या नामांतरण करवाने की शिकायत की थी.
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जिस पर कार्रवाई हेतु मामला पुलिस महानिदेशक को सौंपा गया था. जिस पर कार्रवाई करते हुए मामले की जांच हेतु पिथौरा के एसडीएम एवं एसडीओपी को आदेशित किया गया था पर उच्च स्तर से जांच के निर्देश के बाद भी अब दो साल के बाद भी मामले की जांच पूरी करना तो दूर प्रारंभ भी नहीं की गई है. उच्च अफसरों के निर्देशों के उल्लंघन से अब पूरा मामला जांच के अभाव में ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है. उक्त मामले में शिकायतकर्ता डॉ. लालबहादुर महंती ने बताया कि उक्त जमीन घोटाला शायद प्रदेश का सबसे बड़ा घोटाला हो सकता है. यदि मामले की जांच की गई तो पूरी 1000 एकड़ से अधिक जमीन वापस शासन के रिकॉर्ड में दर्ज हो सकती है जिससे भूमि के अभाव में शासन की रुकी अनेक योजनाएं क्रियान्वित हो सकती है.
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उक्त संबंध में डॉ लालबहादुर महंती ने बताया कि इस क्षेत्र में करीब एक हजार एकड़ से अधिक शासकीय (घास, बड़े झाड़ जंगल एवं कोटवारी) एवं आदिवासी भूमि फर्जी अनुमति से डायवर्सन कर कुछ भू-माफिया द्वारा बेच दी गई है. जिसकी शिकायत वे लगातार करते रहे हैं. प्रदेश में भूपेश सरकार आने के बाद मामले की शिकायत पर कार्रवाई प्रारंभ हुई पर सरकार एवं उच्चधिकारियों के निर्देश के बाद अब 2 वर्ष बाद भी जांच प्रारंभ नहीं की जा सकी है. प्रशासन के रवैये के चलते अब वे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे.







