विष्णुचंद्र शर्मा
खरसिया. अंचल में पर्यटन के लिए वर्षों से प्रसिद्ध प्राकृतिक राम झरना को राम वन गमन स्थल के चिन्ह से वंचित रखने पर भाजपा नेता ओपी चौधरी ने कटाक्ष करते हुए इस ऐतिहासिक स्थल को भी सम्मिलित करने की मांग की है. ओपी चौधरी ने सोशल मीडिया में पोस्ट करते हुए कहा कि जो लोग भगवान राम के अस्तित्व को ही नकारने का शपथपत्र कोर्ट में दे चुके थे, जिन्होंने राम मंदिर के मुद्दे को 1949 से लेकर अब तक लटकाए रखा. अब अयोध्या में भव्य ऐतिहासिक राम-मंदिर बनने जा रहा है और केंद्र ने स्वयं भगवान श्रीराम के वन-गमन पथ सर्किट की योजना बनाई, तो वे भी राजनीति के लिए प्रभु श्रीराम को याद करने लगे. पर वे भूल गए कि रायगढ़ के रामझरने का भी प्रभु श्री राम की दृष्टि से विशेष महत्त्व है, छत्तीसगढ़ सरकार को चाहिए कि इसे भी श्रीराम वन गमन पथ में जोड़ा जाए.
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आस्था और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है राम झरना
रामझरना वर्षों से अंचल ही नहीं वरन दूर-दूर तक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है. वहीं हिंदुओं की आस्था और विश्वास का प्रतीक स्थल भी है. मान्यता है कि एक बार माता सीता को जोर से प्यास लगी तब श्रीराम को यहां पानी होने का आभास हुआ और उन्होंने अपने बाण बाढ़ द्वारा धरती से पानी निकाला जो अब तक झरने के रूप में अविरल बह रहा है. चौधरी ने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक स्थल को राम वन गमन मार्ग से जोड़ना बहुत ही ज्यादा जरूरी है.
वाल्मीकि रामायण में उल्लेखित है दंडकारण्य
दंडकारण्य नाम से विख्यात छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम के वनागमन यात्रा की पुष्टि वाल्मीकि रामायण से होती है. शोधकर्ताओं के अनुसार श्रीराम ने अपने वनवास काल के 14 वर्षों में से लगभग 10 वर्ष से अधिक का समय छत्तीसगढ़ में व्यतीत किया था. मुन्नूलाल यदु के द्वारा रचित दंडकारण्य-रामायण भी प्रकाशित हुई. वहीं इसी विषय पर डॉ. हेमु यदु की भी छत्तीसगढ़ पर्यटन में राम वनगमन पथ के नाम से पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है.
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