नई दिल्ली. अस्पतालों में आग के मामले पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस शाह की बेंच में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अस्पताल मरीजों के इलाज पर बहुत कम ध्यान देने वाला रियल एस्टेट उद्योग बन गया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अस्पताल संकट में मरीजों को सहायता प्रदान करने के लिए होते हैं, लेकिन यह व्यापक रूप से महसूस किया जाता है कि वे पैसे कमाने की मशीन बन गए हैं, जो मरीजों को परेशानी को बढ़ाते हैं.
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सुप्रीम कोर्ट ने भवन उपयोग अनुमति के संबंध में अस्पतालों के लिए समय सीमा जून, 2022 तक बढ़ाने को लेकर गुजरात सरकार की जमकर खिंचाई की. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से अस्पतालों को छूट देने वाली इस अधिसूचना को वापस लेने को कहा. पीठ ने कहा कि एक मरीज जो कोविड से ठीक हो गया था और उसे अगले दिन छुट्टी दी जानी थी, परंतु आग लगने से उसकी मौत हो गई और दो नर्सें भी जिंदा जल गईं. पीठ ने कहा कि ये मानवीय त्रासदी हैं, जो हमारी आंखों के सामने हुआ. फिर भी हम इन अस्पतालों के लिए समय बढ़ाते हैं.
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