नई दिल्ली. कार्तिक शुक्ल द्वितिया को भाई दूज या भैया दूज का पर्व मनाया जाता है. इस तिथि से यमराज और द्वितिया तिथि का संबंध होने के कारण इसको यमद्वितिया भी कहा जाता है. भाई दूज का त्योहार भाई-बहन के अपार प्रेम और समर्पण का प्रतीक है. इस दिन बहनें अपने भाई का तिलक करती हैं. उसका स्वागत सत्कार करती हैं और उनके लम्बी आयु की कामना करती हैं. माना जाता है कि जो भाई इस दिन बहन के घर पर जाकर भोजन ग्रहण करता है और तिलक करवाता है, उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती.
भाई दूज का शुभ मुहूर्त
दोपहर 01:11 से दोपहर 03:23 तक
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ऐसे मनाएं भाई दूज का त्योहार
आज के दिन भाई यमुना के जल से स्नान करें या ताजे जल से स्नान करें. अपनी बहन के घर जाएं और वहां बहन के हाथों से बना हुआ भोजन ग्रहण करें. बहनें भाई को भोजन कराएं, उनका तिलक करके आरती करें. भाई यथाशक्ति अपनी बहन को उपहार दें.
भाई दूज की पौराणिक कथा
यमुना अक्सर अपने भाई यमराज से स्नेहवश निवेदन करती कि वे उनके घर आकर भोजन ग्रहण करें. पर यमराज व्यस्त रहने के कारण यमुना की बात को टाल देते थे. कार्तिक माह के शुक्ल द्वितीया को यमुना अपने द्वार पर भाई यमराज को खड़ा देखकर हर्ष-विभोर हो जाती हैं. प्रसन्नचित्त होकर भाई का स्वागत सत्कार कर भोजन करवाती हैं. बहन यमुना के प्रेम, समर्पण और स्नेह से प्रसन्न होकर यमदेव ने वर मांगने को कहा, तब बहन यमुना ने भाई यमराज से कहा कि आप प्रतिवर्ष इस दिन मेरे यहां भोजन करने आएं तथा इस दिन जो बहन अपने भाई को टीका कर भोजन खिलाए उसे आपका भय न रहे. यमराज ‘तथास्तु’ कहकर यमलोक चले गए. तब से मान्यता है कि जो भाई आज के दिन पूरी श्रद्धा से बहन के आतिथ्य को स्वीकार करता है उसे और उसकी बहन को यमदेव का भय नहीं रहता है.











