नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा फैसला किया है. अब राज्य में पीजी करने वाले डॉक्टरों को कम से कम 10 साल तक सरकारी नौकरी करनी पड़ेगी. डॉक्टरों ने अगर बीच में नौकरी छोड़ी तो उन्हें एक करोड़ रुपए का जुर्माना भरना पड़ेगा. सरकारी प्रवक्ता के मुताबिक इसके अलावा नीट में छूट की व्यवस्था भी की गई है. ताकि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को पूरा किया जा सके. स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव की तरफ से नौ दिसंबर को आदेश जारी कर दिया गया. सभी अस्पतालों में आदेश पहुंच गया है.
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आदेश में ये भी साफ कहा गया है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर को तत्काल नौकरी ज्वाइन करनी होगी. इसके अलावा पीजी के बाद सरकारी डॉक्टरों को सीनियर रेजिडेंसी में रुकने पर भी रोक लगा दी गई है. नए नियम में कहा गया है कि विभाग की ओर से इस संबंध में अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं जारी किया जाएगा. नई मेडिकल गाइड लाइन में अगर कोई डॉक्टर बीच में ही पीजी छोड़ देता है तो उसे तीन सालों के लिए डिबार कर दिया जाएगा. इन तीन सालों में वो दोबारा एडमिशन नहीं ले सकते हैं.
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