नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश की योगी कैबिनेट ने मंगलवार को ‘विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020’ के मसौदे को मंजूरी दे दी. राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही यह कानून प्रभावी हो जाएगा. अध्यादेश में धोखे से धर्म बदलवाने पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान है. वहीं, सिर्फ शादी के लिए किया गया धर्म परिवर्तन मान्य नहीं होगा. ऐसे विवाह को शून्य माना जाएगा. अध्यादेश के मुताबिक गुमराह करके, झूठ बोलकर, लालच देकर, जबरदस्ती या शादी के जरिए धर्म बदलवाने का दोष साबित होने पर कम से कम एक साल और अधिकतम पांच साल की सजा होगी.
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दोषी पर 15 हजार रुपए जुर्माना भी लगेगा. महिला SC/ST कैटेगरी में आती है तो उसका जबरन या झूठ बोलकर धर्म परिवर्तन कराना कानून का उल्लंघन माना जाएगा. इसमें कम से कम 3 साल और अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है. ऐसे मामले में जुर्माना 25 हजार रुपए होगा. सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामले में कम से कम 3 साल और अधिकतम दस साल तक की सजा हो सकती है. जुर्माने की राशि 50 हजार तक होगी. अगर कोई धर्म बदलना चाहता है तो उसे डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को दो महीने पहले सूचना देनी होगी. ऐसा न करने पर 6 महीने से 3 साल तक की सजा हो सकती है. जुर्माने की रकम 10 हजार रहेगी.
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