रजिंदर खनूजा
पिथौरा. देवपुर परिक्षेत्र में वन अमला ने जंगली सुअर का शिकार कर मांस पका रहे चार ग्रामीणों के खिलाफ कार्रवाई की है. इनमें तीन को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया जबकि एक अन्य फरार बताया जा रहा है. सभी आरोपियों पर वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है. जानकारी के अनुसार वन परिक्षेत्र देवपुर अंतर्गत शुक्रवार को प्रभारी रेंजर पंचराम यादव को मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ लोग बांधा तालाब के पास जंगली सुअर का शिकार कर घर में रखे हैं. सूचना के बाद वन विभाग की टीम ने सुबह 7 बजे चारों आरोपियों के बया ग्राम स्थित घरों में छापामार कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में मांस जब्त की गई. रूपधर बरिहा पिता सूजन बरिहा, बरसाती पिता चेतराम कुम्हार, रामेश्वर पिता सोहत निषाद को मांस सहित पकड़कर वन विभाग ने कार्रवाई की है. वहीं पंचम पिता शिवशंकर कुम्हार फरार है.
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मांस, तीर कमान और तार जब्त
वन विभाग ने चारों शिकार के आरोपियों के घर ली गई तलाशी में 11 किलो मांस, तीर कमान दो नग, सुअर का सिर, खाल, पूंछ एवं मांस काटने के लिए प्रयुक्त बसूला, कुल्हाड़ी, कट्टर, तराजू, बाट, बड़ी गंजी जब्त की है. वन विभाग द्वारा वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9, 50, 39, 51 के तहत कार्रवाई की गई है. उक्त कार्रवाई उप मंडल अधिकारी कसडोल यूएस ठाकुर के मार्गदर्शन में वन परिक्षेत्र अधिकारी देवपुर पंचराम यादव, परिक्षेत्र सहायक बया भुनेश्वर वर्मा, परिक्षेत्र सहायक देवपुर बसंत खांडेकर, परिक्षेत्र सहायक चन्हट शिवसिंह मरकाम, वनरक्षक अजित ध्रुव, गुरबरी बघेल, संदीप साहू, काशीराम सिन्हा, गजेंद्र पटेल, अश्वनी साहू, छोटेलाल रात्रे, बसंत चौहान, मुंशी दीवान, सुरक्षा श्रमिक सुधीर राव, कलीम खान, हरिवंश साहू, रत्नेश बरिहा, फिरत यादव एवं समस्त स्टाफ परिक्षेत्र देवपुर के सहयोग से की गई.
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थम नहीं रहा शिकार का सिलसिला
पूरे प्रदेश के वन क्षेत्रों में इन दिनों विद्युत करंटयुक्त तार बिछाकर शिकार का सिलसिला जारी है. प्रदेश के प्रायः अधिकांश जंगलों में इस तरह के शिकार से ग्रामीणों का ग्रास बनने वाले वन्यप्राणी चीतल, साम्भर एवं जंगली सुअर के साथ हिंसक वन्य प्राणी भी इनमें फंस कर मारे जा रहे हैं. करंट की चपेट में आने से अब तक प्रदेश में करीब आधा दर्जन हाथी, भालू सहित अन्य जंगलों की शोभा बढ़ाने वाले वन्य प्राणी भी मारे जा रहे हैं. इस फंदे की चपेट में आने से अनेक राहगीरों की मौत भी हो चुकी है बावजूद वन विभाग के उच्च पदस्थ अधिकारियों की इस ओर अनदेखी चर्चा में है. वहीं शिकारियों द्वारा अवैध तरीके से विद्युत जोड़ने की खबर के बावजूद विद्युत मंडल द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से विद्युत मंडल भी सवालों के दायरे में आ गया है.







