बागबाहरा. किसी भी किए गए अपराध को और ज्यादा गंभीर तब माना जाता है, जब अपराध को कानून के रक्षक या शासन का मुखिया कारित करता है और जानबूझकर किए गए अपराध तो क्षमायोग्य भी नहीं होता है. छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को कम करने लॉकडाउन किया जा रहा, ऐसे में प्रदेश सरकार के मुखिया अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए प्रदेश मुख्यालय जहां आएदिन कोरोना विस्फोट हो रहा है वहां अनलॉक कर सारे नियम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए पैदल मार्च कर दिए और आम जनमानस को निर्देश मानने कहा जाता है यह हास्यास्पद ही नहीं शर्मनाक है. उपरोक्त बातें पूर्व जनपद अध्यक्ष नरेन्द्र चंद्राकर ने कही हैं.
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उन्होने कहा कि वर्तमान सरकार में पीछे दरवाजे से बाँटी गई नियम विरुद्ध लालीपॉप ‘संसदीय सचिवों’ के नियोजित स्वागत समारोह में नियम कानून की जिस तरह से धज्जियाँ उड़ाई गई उसे देखने से कहीं यह नहीं लगता कि हमारे प्रदेश में कोरोना वायरस का भीषण प्रकोप है और कोविड-19 का नियम प्रभावशील है. उस स्वागत समारोह को यह सोचकर एक बार अनदेखा भी किया जा सकता है कि बेचारे विधायकों को ले देकर एक झुनझुना मिला है जो शायद उनके इस कार्यकाल में पहली और अंतिम बार हो, इसलिए अति उत्साह में वे खुद को नहीं रोक पाए और कानून को ताक पर रखकर अपना स्वागत खुद ही भीड़ से करवा लिए. पर आज केन्द्र में पारित कृषि विधेयक के विरुद्ध में शासक दल और उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों ने जिस तरह जूलूस, रैली, प्रदर्शन किया वह अति निंदनीय है.
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जिन पर पूरे राज्य में शांति व्यवस्था कायम रखने की जिम्मेदारी है, वही व्यक्ति जनता को दिग्भ्रमित करने नियम कानून को अपने हाथ में ले लें तो उनमें और एक अपराधी में कोई अंतर नहीं रह जाता. पुलिस पांच व्यक्तियों को एक साथ पाए जाने पर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई कर रही है, जबकि हजारों लोग इस जूलूस में बिना सोशल डिस्टेंस के साथ-साथ चल रहे हैं. इस स्थिति में माननीय मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री सिर्फ खानापूर्ति के लिए जनता से अपील करते हैं ऐसा माना जा सकता है. माननीय प्रधानमंत्री जी के जनहित कार्यों से राज्य सरकार विचलित होकर आपा खोने लगी है जो उनके जनमानस में गिरते ग्राफ का स्पष्ट प्रमाण है.







