भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से चतुर्दशी तिथि तक भगवान गणेश की उपासना के लिए गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है. श्री गणेश प्रतिमा की स्थापना चतुर्थी पर की जाती है और विसर्जन चतुर्दशी को किया जाता है. माना जाता है कि प्रतिमा का विसर्जन करने से भगवान पुनः कैलाश पर्वत पर पहुंच जाते हैं. स्थापना से ज्यादा विसर्जन की महिमा होती है. इस दिन अनंत शुभ फल प्राप्त किए जा सकते हैं. अतः इस दिन को अनंत चतुर्दशी भी कहते हैं. ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक कुछ विशेष उपाय करके इस दिन जीवन की मुश्किल से मुश्किल समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है. करें ये उपाय-
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एक भोजपत्र या पीला कागज लें.
अष्टगंध कि स्याही या नयी लाल स्याही की कलम भी लें.
भोजपत्र या पीले कागज पर सबसे ऊपर स्वस्तिक बनाएं.
इसके बाद स्वस्तिक के नीचे ॐ गं गणपतये नमः लिखें.
उसके बाद क्रम से एक-एक कर के अपनी सारी समस्याएं लिखें.
लिखावट में काट पीट न करें और कागज़ के पीछे कुछ न लिखें.
समस्याओं के अंत में अपना नाम लिखें फिर गणेश मंत्र लिखें.
सबसे आखिर में स्वस्तिक बनाएं.
कागज़ को मोड़ कर रक्षा सूत्र से बांध लें और इसे गणेश जी को समर्पित करें.
इसको भी गणेश जी की प्रतिमा के साथ ही विसर्जित करें.
समस्त समस्याओं से मुक्ति मिलेगी.
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