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पीएम मोदी ने कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत लॉन्च की 1 लाख करोड़ रुपए की वित्तपोषण सुविधा

Published on: August 9, 2020
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत एक लाख करोड़ रुपए की वित्तपोषण सुविधा को लॉन्च किया. इसी के साथ प्रधानमंत्री ने वर्चुअल कार्यक्रम में एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत साढ़े आठ करोड़ से ज्यादा किसानों को 17 हजार करोड़ रुपए की राशि जारी की. प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हलषष्टी है, भगवान बलराम की जयंती है. सभी देशवासियों को, विशेषतौर पर किसान साथियों को हलछठ की, दाऊ जन्मोत्सव की, बहुत-बहुत शुभकामनाएं. हलषष्टी और भगवान बलराम की जयंति के बेहद पावन अवसर पर देश में कृषि से जुड़ी सुविधाएं तैयार करने के लिए एक लाख करोड़ रुपए का विशेष फंड लॉन्च किया गया है.

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उन्होने कहा कि साढ़े 8 करोड़ किसान परिवारों के खाते में, पीएम किसान सम्मान निधि के रूप में 17 हज़ार करोड़ रुपए ट्रांस्फर करते हुए भी मुझे बहुत संतोष हो रहा है.बीते डेढ़ साल में इस योजना के माध्यम से 75 हज़ार करोड़ रुपए सीधे किसानों के बैंक खाते में जमा हो चुके हैं. इसमें से 22 हज़ार करोड़ रुपए तो कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन के दौरान किसानों तक पहुंचाए गए हैं. योजना के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इस योजना से गांव में किसानों के समूहों को, किसान समितियों को, FPOs को वेयरहाउस बनाने के लिए, कोल्ड स्टोरेज बनाने के लिए, फूड प्रोसेसिंग से जुड़े उद्योग लगाने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए की मदद मिलेगी. पहले e-NAM के ज़रिए, एक टेक्नॉलॉजी आधारित एक बड़ी व्यवस्था बनाई गई. अब कानून बनाकर किसान को मंडी के दायरे से और मंडी टैक्स के दायरे से मुक्त कर दिया गया. उन्होने कहा कि अब किसान के पास अनेक विकल्प हैं. अगर वो अपने खेत में ही अपनी उपज का सौदा करना चाहे, तो वो कर सकता है. या फिर सीधे वेयरहाउस से, e-NAM से जुड़े व्यापारियों और संस्थानों को, जो भी उसको ज्यादा दाम देता है, उसके साथ फसल का सौदा किसान कर सकता है. इस कानून का उपयोग से ज्यादा दुरुपयोग हुआ. इससे देश के व्यापारियों को, निवेशकों को, डराने का काम ज्यादा हुआ. अब इस डर के तंत्र से भी कृषि से जुड़े व्यापार को मुक्त कर दिया गया है. पीएम मोदी ने कहा कि अब हम उस स्थिति की तरफ बढ़ रहे हैं, जहां गांव के कृषि उद्योगों से फूड आधारित उत्पाद शहर जाएंगे और शहरों से दूसरा औद्योगिक सामान बनकर गांव पहुंचेगा. यही तो आत्मनिर्भर भारत अभियान का संकल्प है, जिसके लिए हमें काम करना है.

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उन्होने कहा कि अब जब देश के बड़े शहरों तक छोटे किसानों की पहुंच हो रही है तो वो ताज़ा सब्जियां उगाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे, पशुपालन और मत्स्यपालन की तरफ प्रोत्साहित होंगे. इससे कम ज़मीन से भी अधिक आय का रास्ता खुल जाएगा, रोज़गार और स्वरोज़गार के अनेक नए अवसर खुलेंगे. जितने भी कदम उठाए जा रहे हैं, इनसे 21वीं सदी में देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर भी बदलेगी, कृषि से आय में भी कई गुणा वृद्धि होगी. हाल में लिए गए हर निर्णय आने वाले समय में गांव के नज़दीक ही व्यापक रोज़गार तैयार करने वाले हैं. ये हमारे किसान ही हैं, जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान देश को खाने-पीने के ज़रूरी सामान की समस्या नहीं होने दी. देश जब लॉकडाउन में था, तब हमारा किसान खेतों में फसल की कटाई कर रहा था और बुआई के नए रिकॉर्ड बना रहा था.

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