बागबाहरा. लॉकडाउन के चलते बाजार बंद हैं और बंद की आड़ में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी लूट मची हुई है. चाहे वह खाने-पीने की वस्तु हो चाहे पेट्रोलियम पदार्थ. नगर में कोरोना से संबंधित एक भी संक्रमित न होने के बावजूद यहां के बाजार को प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर बंद कराया है. जिससे सभी वर्ग के लोग खासे परेशान हैं. व्यापारी वर्ग में बेहद आक्रोश है. बेरोजगारी का दंश झेल रहे लोग मुद्रा ऋण लेकर स्वरोजगार से जुड़ रहे लोग अब पुनः बेरोजगारी बेकारी से जूझ रहे हैं. शहर में ऐसे कई छोटे व्यापारी हैं जो भविष्य में दुकान चलाने के लायक नहीं बचे हैं. व्यावसायियों की मानें तो लॉकडाउन में तीन महीने से व्यापार बंद होने से घर खर्च में जमा पूंजी खत्म हो गई है.
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उन्हे बैंकों, साहूकारों से लिए कर्ज वापसी की चिंता सता रही है. दूसरी ओर बाजार बंद से कालाबाजारी चरम पर है. प्रशासन द्वारा आवश्यक सेवा पेट्रोल पंप बंद करने से लोग परेशान हो रहे हैं. सुबह 10.30 बजे पेट्रोल पंप बंद करने के फरमान से वाहन चालक ईंधन के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं चूंकि राष्ट्रीय राजमार्ग में गाड़ी खड़ी हो रही है. कार में परिवार सहित सफर करने वाले लोग सबसे ज्यादा तकलीफ झेलने विवश हो रहे हैं. पेट्रोल पंप सुबह 10.30 बजे तक खुलने के बाद बाकी समय बंद रहने से बाहर बाजार में पेट्रोल की जमकर कालाबाजारी हो रही है. बताया जा रहा है कि पेट्रोल 100 रुपए प्रति लीटर से अधिक पर बेचा जा रहा है.
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इस कालाबाजारी की ओर स्थानीय प्रशासन का ध्यान नहीं जा रहा है. व्यापारी वर्ग क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से भारी नाराज हैं. व्यापारी पूछ रहे हैं कि आखिर बागबाहरा को किस जुर्म की सजा दी जा रही है. जब प्रदेश के अनेक शहर दर्जनों कोरोना संक्रमित होने के बावजूद खुला है और जिला मुख्यालय, नगर पालिका क्षेत्र बागबाहरा को किस कारण से बंद किया गया है. जनप्रतिनिधि प्रशासन से पूछ नहीं पा रहे हैं कि आखिर प्रदेश में दो तरह का कानून क्यों लागू किया गया है.
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— Cg Janadesh (@CJanadesh) August 4, 2020







