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कोरोना से लेकर लद्दाख तक, पढ़िए पीएम मोदी के मन की बात की बड़ी बातें

Published on: June 28, 2020
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के जरिए देश को संबोधित किया. उन्होने कोरोना से लेकर लद्दाख में शहीद हुए जवानों का जिक्र किया. उन्होने कहा कि लॉकडाउन से ज्यादा सतर्कता हमें अनलॉक के दौरान बरतनी है. कोरोना को हराने के साथ ही अर्थव्यवस्था को बचाना भी जरूरी है. पढ़िए पीएम मोदी के मन की बात की बड़ी बातें-

देश नए लक्ष्य प्राप्त करेगा

पीएम मोदी ने कहा कि भारत में जहां एक तरफ़ बड़े-बड़े संकट आते गए, वहीं सभी बाधाओं को दूर करते हुए अनेकों-अनेक सृजन भी हुए. नए साहित्य रचे गए, नए अनुसंधान हुए, नए सिद्धांत गड़े गए, यानि संकट के दौरान भी हर क्षेत्र में सृजन की प्रक्रिया जारी रही और हमारी संस्कृति पुष्पित-पल्लवित होती रही. इसी साल में, देश नए लक्ष्य प्राप्त करेगा, नयी उड़ान भरेगा, नयी ऊंचाइयों को छुएगा. मुझे, पूरा विश्वास, 130 करोड़ देशवासियों की शक्ति पर है, आप सब पर है, इस देश की महान परम्परा है.

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भारत मित्रता निभाना जानता है तो उचित जवाब देना भी जानता है

उन्होने कहा कि दुनिया ने इस दौरान भारत की विश्वबंधुत्व की भावना को भी महसूस किया है. लद्दाख में भारत की भूमि पर आंख उठाकर देखने वालों को करारा जवाब मिला है. भारत मित्रता निभाना जानता है तो आंखों में आंखे मिलाकर देखना और उचित जवाब देना भी जानता है. अपने वीर सपूतों के परिवारों के मन में जो जज्बा है, उन पर देश को गर्व है. लद्दाख में हमारे जो वीर जवान शहीद हुए हैं, उनके शौर्य को पूरा देश नमन कर रहा है, श्रद्धांजलि दे रहा है. पूरा देश उनका कृतज्ञ है, उनके सामने नत-मस्तक है. इन साथियों के परिवारों की तरह ही, हर भारतीय, इन्हें खोने का दर्द भी अनुभव कर रहा है.

लोकल के लिए वोकल होंगे तो यह भी देश सेवा ही होगी

पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के पहले हमारा देश डिफेंस सेक्टर में दुनिया के कई देशों से आगे था. उस समय कई देश जो हमसे कहीं पीछे थे वे आज आगे हैं. हमें अपने पुराने अनुभवों को लाभ उठाना चाहिए था वह हम नहीं उठा सके. आज भारत प्रयास कर रहा है. आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ा रहा है. कोई भी विजन सबके सहयोग के बिना नहीं हो सकता. लोकल के लिए वोकल होंगे तो यह भी देशसेवा ही होगी.

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किसानों को हर तरह की मदद देने की कोशिश

उन्होने कहा कि कृषि में भी दशकों से लॉकडाउन में फंसी थीं, इसे भी अनलॉक कर दिया गया है. इससे किसानों को अपनी फसलें किसी को भी कहीं भी बेचने की आजादी मिली है. इसके साथ ही उन्हें अधिक ऋण मिलना भी सुनिश्चित हुआ है. देशवासियों हर महीने हम ऐसी खबरें पढ़ती हैं जो हमें भावुक कर देती हैं. बताती हैं कि हर भारतीय लोगों की मदद करने में जुटा है.

देशभर से लॉकडाउन की कहानियां सामने आ रहीं

पीएम मोदी ने कहा कि अरुणाचल के सियाम गांव में लोगों ने गांव के बाहर 14 अस्थायी झोपड़ियां बना दीं और तय किया कि बाहर से आने वाले 14 दिन इन्हीं झोपड़ियों में रहना होगा. उन्हें सभी जरूरत की चीजें उपलब्ध कराई गईं. जैसे कपूर आग में तपने पर भी अपनी सुगंध नहीं छोड़ता, ऐसे ही आपदा में अच्छे लोग अपने गुण नहीं छोड़ते. हमारे श्रमिक साथी भी इसका जीता-जागता उदाहरण है. हमारे प्रवासी श्रमिकों की ऐसी ही कहानियां आ रही हैं. ऐसे ही कुछ श्रमिक साथियों ने कल्याणी नदी का उद्धार करना शुरू किया. ऐसी लाखों किस्सें कहानियां हैं जो हम तक नहीं पहुंच पाई हैं. आपके आसपास ऐसी घटनाएं हुई हों तो मुझे लिखें. यह लोगों को प्रेरणा देंगी.

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बच्चे घर में दादा-दादी का इंटरव्यू करें

उन्होने कहा कि कोरोना की वजह से कई लोगों ने मानसिक तनाव जिंदगी गुजारी. वहीं कुछ लोगों ने लिखा कि कैसे उन्होंने इस दौरान छोटे-छोटे पलों को परिवारों के साथ बिताया. मेरे नन्हें साथियों से भी मैं आग्रह करना चाहता हूं. एक काम कीजिए, माता-पिता से पूछकर मोबाइल उठाइए और दादा-दादी और नाना-नानी का इंटरव्यू कीजिए. पूछिए, उनका बचपन में रहन-सहन कैसा था, क्या खेलते थे, मामा के घर जाते थे, त्योहार कैसे मनाते थे. उन्हें 40-50 साल पीछे जिंदगी में जाना आनंद देगा और आपको तब की चीजें सीखने को मिलेंगी और परिवार के लिए एक अच्छा अमूल्य खजाना और वीडियो एलबम भी बन जाएगा.

हमारा थोड़ा प्रयास काफी मददगार होगा

पीएम मोदी ने कहा कि देश के एक बड़े हिस्से में मानसून पहुंच चुका है. इस बार मौसम वैज्ञानिक भी मानसून को लेकर उत्साहित हैं. अच्छी बारिश होगी तो प्रकृति प्रफुल्लित होगी, किसान भी खुश होंगे. इससे प्रकृति रीफिलिंग करती है. इसमें हमारा थोड़ा प्रयास काफी मददगार होगा. कर्नाटक के कामेगौड़ा जी बहुत असाधारण काम किया है. वे अपने जानवर चराते हैं और आसपास छोटे-छोटे तालाब बनाने में जुटे हैं. अब तक वे 16 तालाब अपनी मेहनत से खोद चुके हैं. हो सकता है कि ये तालाब बहुत छोटे हों, लेकिन उनका यह प्रयास बहुत बड़ा है.

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