सौरभ गोयल
सरायपाली. गुजरात से लौटीं एक गर्भवती महिला ने सोमवार को क्वारंटाइन सेंटर में ही शिशु को जन्म दिया. महिला प्रसव पीड़ा से कराहती रहीं पर न तो उन्हे घर-परिवार की सहायता मिल पाई और न ही जरूरी चिकित्सा सुविधा. यहां तक कि गांव वालों ने मितानिन को भी क्वारंटाइन सेंटर में जाने से रोक दिया. जब तक सरकारी एम्बुलेंस काकेनचुआं पहुंची तब तक मजदूर महिला मां बन चुकीं थीं. फिलहाल, बीएमओ के निर्देश पर जच्चे-बच्चे को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाटसेन्द्री में रखा गया है. जानकारी के मुताबिक ग्राम काकेनचुआं निवासी भागीरथी साहू और उनकी पत्नी दोनों गुजरात मजदूरी करने गए थे.
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24 मई को ही काकेनचुआं वापस आए हैं. जहां नियमतः उन्हें 14 दिन के क्वारंटाइन में स्कूल में रखा गया. भागीरथी ने बताया कि सोमवार को 12 बजे के बाद उनकी गर्भवती पत्नी को दर्द हुआ. पहले तो उन्होने सामान्य दर्द समझकर ध्यान नहीं दिया पर जब दर्द से बहुत अधिक कराहने लगीं तो घबरा गया. ग्रामीणों से सहयोग मांगा तो कोई भी सहयोग देने तैयार नहीं हुआ. यहां तक कि मितानिन को भी यह कहकर अंदर नहीं जाने दिया कि उन्हे भी 14 दिन क्वारंटाइन में रहना होगा. फोन से सरकारी सुविधा मांगने की कोशिश की गई पर कोई सुविधा नहीं मिली.
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जब तक सरकारी एम्बुलेंस पहुंची तब तक वह एक शिशु को जन्म दे चुकी थीं. मालूम हो कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाटसेन्द्री में आइसोलेशन वार्ड नहीं है बावजूद जच्चा-बच्चा दोनों को पाटसेन्द्री के जनरल वार्ड में ही रखा गया है. जबकि कोरोना संक्रमण को देखते हुए उन्हे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या अन्य किसी अस्पताल के आइसोलेशन सेंटर में रखा जाना चाहिए. इधर, मजदूर ने बताया कि पीएचसी पाटसेन्द्री में उन्हें किसी प्रकार की सुविधा नहीं मिल पा रही है. यहाँ जच्चा-बच्चा को खतरा महसूस हो रहा है. इस अस्पताल से तो अच्छा गांव के ही क्वारंटाइन सेंटर ठीक है. मामले को लेकर कलेक्टर सुनील जैन को जानकारी दी गई उन्होंने मजदूर की पीड़ा को समझते हुए तत्काल मदद की बात कही हैं.
कोरोना का इस कदर खौफ… मरीज को प्राथमिक उपचार भी नहीं दिया, अब रिपोर्ट आई निगेटिव https://t.co/KEdEYECVCV
— Cg Janadesh (@CJanadesh) May 26, 2020







