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मानव-हाथी द्वंद को रोकने महासमुंद-बलौदाबाजार में स्पेशल टास्क फोर्स क्यों नहीं?

Published on: September 24, 2021
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रजिंदर खनूजा

पिथौरा. प्रदेश में हाथियों की बढ़ती संख्या एवं मानव-हाथी द्वंद को रोकने प्रदेश सरकार द्वारा मरवाही, कटघोरा, जशपुर, धरमजयगढ़, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया है पर हाथियों से सर्वाधिक प्रभावित महासमुंद एवं बलौदाबाजार जिले को इससे अलग रखा गया है. छत्तीसगढ़ में लगातार हो रहे हाथियों की चहलकदमी एवं ग्रामीणों पर लगातार हो रहे हमले पर प्रदेश सरकार भी चिंतित दिखाई दे रही है. हाथियों के रहवास के लिए अलग-अलग स्थानों में इनका आना-जाना जारी है.

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इधर, हाथी-मानव द्वंद में मानव के हताहतों की बढ़ती संख्या से प्रदेश सरकार अब संजीदा होने लगी है, इसके लिए सरकार ने स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया है. जो मरवाही वन मंडल, कटघोरा वन मंडल, जशपुर वन मंडल, धरमजयगढ़ वन मंडल के हाथी प्रभावित क्षेत्रों में जाकर उसके रहवास और वातावरण का अध्ययन करके स्थाई निदान निकालने योजना बना रही है, जिसके लिए सरकार ने टास्क फोर्स वर्किंग समूह सदस्य राज्य योजना आयोग छत्तीसगढ़ की टीम को प्रभावित क्षेत्रों में दौरा कर आम नागरिकों, ग्रामीणों से समन्वय बनाकर स्थाई हल निकालने का प्रयास करने के निर्देश दिए हैं.

3 दर्जन से अधिक जानें जा चुकीं

प्रदेश सरकार द्वारा हाथी समस्या के स्थायी निदान हेतु टास्क फोर्स का गठन कर समस्या समाधान के निर्देश दिए गए हैं. राज्य शासन के इस निर्देश में आश्चर्यजनक ढंग से प्रदेश के सर्वाधिक हाथी प्रभावित जिले महासमुंद एवं बलौदाबाजार को शामिल नहीं किया गया है. अब शासन के उक्त निर्देशों से सवाल उठने लगे हैं कि क्या इन दोनों जिलों को शासन हाथी प्रभावित नहीं मानती. ज़बकि इन दोनों जिलों में हाथियों से प्रभावित ग्रामीणों को करोड़ों का मुआवजा हाथियों द्वारा फसल खराब करने के एवज में बांटा जा चुका है.

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इसके अलावा दोनों जिलों में करीब तीन दर्जन से अधिक लोगों की जान हाथियों के हमले में जा चुकी है. क्षेत्र के ग्रामीण अब हाथियों के विगत पांच वर्षों से लगातार विचरण एवं जान-माल के खतरे के मद्देनजर हमेशा मानसिक तनाव का जीवन जी रहे हैं. क्षेत्रवासी चाहते हैं कि हाथियों के रहवास हेतु सरकार कोई ठोस कदम उठाए और हाथी-मानव द्वंद को रोककर उन्हें तनावमुक्त जीवन जीने का मौका दे.

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