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छत्तीसगढ़ में भी है माँ वैष्णोदेवी का मंदिर, इस पहाड़ी पर बैठी माँ हरती हैं पीर

Published on: October 17, 2020
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विष्णुचंद्र शर्मा

रायगढ़. सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच रायगढ़ जिले के तहसील मुख्यालय खरसिया से बारह किलामीटर की दूरी पर बोतल्दा की पहाड़ी पर ग्राम उल्दा में माँ वैष्णो देवी का हूबहू वैसा ही मंदिर है, जैसा जम्मू-कटरा में माता का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है. पहाड़ी में माँ वैष्णो देवी का मंदिर और पास ही बहता प्राकृतिक झरना बरबस ही भक्तों को अपनी ओर खींच ले आता है. नवरात्रों में ग्रामीण अंचल से ही नहीं वरन दूर-दूर से लोग इस मनोरम स्थान पर माता के दर्शनों हेतु आते हैं. माना जाता है, जो भक्त अपनी फरियाद लेकर कटरा तक नहीं जा पाते, माता ने उनके लिए छत्तीसगढ़ में अपना दरबार बनाया है. नवरात्रों में यहां 9 दिनों तक मेला सा लगता है, तो अटूट लंगर भी लगा रहता है.

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जिस में प्रतिदिन हजारों भक्त मां के आशीर्वाद स्वरुप प्रसाद प्राप्त करते हैं. दिनोंदिन माता के इस दरबार की प्रसिद्धि बढ़ती चली जा रही है. इस दरबार को और आकर्षक एवं मनोरम बनाने हेतु लगभग 1 किलोमीटर के दायरे में भगवान की सुंदर प्रतिमाएं एवं मंदिरों का निर्माण भी हो चुका है. वहीं नजदीकी ही ग्राम बरगढ़ में अंचल का प्रसिद्ध शिवालय सिद्धेश्वर धाम है, तो सूती-घाट के नजदीक ग्राम पतरापाली-उल्दा की पहाड़ियों में भंवरखोल नामक प्रसिध्द शैलाश्रय है, जिसकी दीवारों पर मत्स्य-कन्या, जंगली भैंसा, भालू, मानव हथेली और भारतीय संस्कृति के शुभंकर ‘स्वास्तिक’ चिन्ह भी अंकित हैं. वहीं बोतल्दा की गुफा में भी आकर्षक शैलचित्र जो हैं, जो ऐतिहासिक हैं.

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