बिलासपुर. हाईकोर्ट ने शादी के बाद शारीरिक संबंध नहीं बनाने वाले कपल के व्यवहार को क्रूरता के बराबर बताया है. कोर्ट ने इसे महत्व देते हुए युवक की तलाक याचिका को स्वीकार कर लिया है. जिसके बाद पति को अपनी पत्नी से तलाक मिल गया है. कोर्ट ने कहा कि शादी के बाद पति या पत्नी में किसी के भी द्वारा शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना क्रूरता की श्रेणी में आता है. दरअसल, बिलासपुर निवासी एन मिश्रा की शादी 25 नवंबर 2007 को हुई थी. उनकी पत्नी अब बेमेतरा में रहती है. उन्होंने पत्नी के अलग रहने पर तलाक के लिए फैमिली कोर्ट में परिवाद प्रस्तुत किया था. इसमें बताया गया कि शादी के कुछ माह रहने के बाद वह मायके चली गई. फिर 8-9 माह बाद ससुराल लौटी.
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11 जुलाई 2009 को युवक के पिता की मौत हो गई. बाद भी महिला अगले महीने फिर मायके चली गई और लौट आई.2010 में वह फिर से मायके चली गई और बिना बताए चार साल तक रही.2008 से 2015 तक बहुत कम समय ससुराल में बिताई और पति व ससुराल वालों को बताए बिना ही साल 2011 में बेमेतरा में शिक्षाकर्मी की नौकरी जॉइन कर ली. ऐसे में वह पति को घर छोड़कर बेमेतरा में रहने के लिए दबाव बना रही थी. परेशान होकर उन्होंने तलाक के लिए अर्जी लगाई. पत्नी के व्यवहार से परेशान होकर पति ने हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के तहत विवाह विच्छेद के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था. जिसे फैमिली कोर्ट ने 13 दिसंबर 2017 को खारिज कर दिया. इस फैसले के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की.
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पत्नी की तरफ से अपने बचाव में तर्क प्रस्तुत किए गए, लेकिन कोर्ट ने पत्नी के बयानों के आधार पर पाया कि दंपती में वर्ष 2010 से ही शारीरिक संबंध नहीं था. वह पति को भारी और दिखने में भद्दा कहती थी और नापसंद करती थी. उसने पति को जानकारी दिए बिना ही शिक्षाकर्मी की नौकरी जॉइन कर ली थी. हाईकोर्ट ने फैसले में कहा है कि यह स्पष्ट है कि अगस्त 2010 से पति-पत्नी के रूप में दोनों के बीच कोई संबंध नहीं है, जो यह निष्कर्ष निकालने के लिए काफी है कि उनके बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं है. पति और पत्नी के बीच शारीरिक संबंध विवाहित जीवन के स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है. एक पति या पत्नी के साथ शारीरिक संबंध से इनकार करना क्रूरता के बराबर है.
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— Cg Janadesh (@CJanadesh) March 2, 2022







