बागबाहरा. लॉकडाउन से इन दिनों सभी वर्ग के लोगों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा सी गई है. राहत के नाम पर जरुरतमंद एकदम कमजोर लोगों को पंचायत के माध्यम से चावल उपलब्ध करा दिया जा रहा है. सबसे ज्यादा परेशानी मध्यमवर्गीय और गरीब मजदूर वर्ग को हो रही है. बागबाहरा खंड से 25 किमी दूर ओड़िशा सीमावर्ती ग्राम पंचायत नर्रा की आबादी 23 सौ है. नर्रा से खरियाररोड की दूरी महज 6 किमी है. यहां के अधिकांश युवा वर्ग के मजदूर यहां काम करते हैं लेकिन अंतर्राज्यीय सीमा व लॉकडाउन की वजह से दोनों राज्यों की पुलिस बल तैनात कर आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. नर्रा में स्थानीय स्तर पर कोई रोजगार का साधन नहीं है.
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शासन द्वारा नर्रा में मनरेगा के तहत दो किसानों का भूमि सुधार का काम प्रारंभ कराया गया है जहां मात्र आठ मजदूर ही काम कर रहे हैं बाकी मजदूर काम के इंतजार में खाली बैठे हैं. पूर्व उपसरपंच थानेश्वर दीवान ने बताया मनरेगा योजना से यहां गौठान की स्वीकृति मिली है.23 मजदूर का मस्टररोल भी निकाला गया है पर उक्त काम मजदूर नहीं कर पा रहे हैं चूंकि ठोस मुरुम होने के कारण कुदाल से खोदाई नहीं की जा सकती. तालाब गहरीकरण का प्रस्ताव विगत माह मनरेगा शाखा में जमा किया गया है पर काम की स्वीकृति नहीं मिली है. यहां के मजदूरों को राहत देने के लिए तत्काल काम स्वीकृत किया जाए। क्षेत्र के दौरे पर पहुंचीं जनपद अध्यक्ष स्मिता हितेश चंद्राकर को इस समस्या से अवगत कराया गया है. यदि काम की स्वीकृति नहीं दी जाती है तो सभी मजदूरों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाए. जनपद अध्यक्ष ने आश्वस्त किया कि तत्काल दो-तीन काम का प्रस्ताव जनपद में जमा करें काम स्वीकृत कराया जाएगा और सभी को रोजगार दिया जाएगा. तालाब गहरीकरण का जो प्रस्ताव भेजा गया है उसे स्वीकृति क्यों नहीं दी गई है अधिकारियों से चर्चा कर काम की स्वीकृति दिलाई जाएगी.
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