रायपुर. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने राजधानी के कोरोना संक्रमण के लिहाज से घोषित कंटेनमेंट ज़ोन में जिला प्रशासन द्वारा कीड़ायुक्त बदबूदार राशन वितरित किए जाने पर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौर में भी प्रदेश सरकार यदि कंटेनमेंट ज़ोन तक के प्रति इस प्रकार दुर्लक्ष्य कर रही है तो इस सरकार को नैतिकता और मानवीयता के लिहाज से एक मिनट भी सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं रह गया है. श्री उपासने ने कहा कि राजधानी के जिस सड्डू इलाके को कोरोना संक्रमित मरीज मिलने के कारण तीन किमी तक सील कर कंटेनमेंट ज़ोन बनाया गया है, वहाँ बीएसयूपी कॉलोनी में शनिवार रात जिला प्रशासन द्वारा वितरित राशन के पैकेट्स कीड़ायुक्त और बदबूदार मिले हैं जिन्हें खाना तो दूर, पास खड़े रहकर उसकी बदबू भी बर्दाश्त नहीं की जा सकती.
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कॉलोनी के लोगों ने तो यहाँ तक कहा कि कोरोना के बजाय लोग तो पहले फूड प्वॉइजनिंग से अनहोनी के शिकार हो जाएंगे. जिला प्रशासन की इस लापरवाही को प्रदेश सरकार की कोरोना-काल में अब तक की सबसे बड़ी अमानवीयता ही माना जाएगा. उन्होने कहा कि भाजपा लगातार कोरोना के इस संकटकाल में प्रदेश सरकार की खामियों को उजागर कर रही है, लेकिन सत्तावादी अहंकार में चूर सरकार न तो व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के प्रति संजीदा नज़र आ रही है और न ही कोरोना की रोकथाम को लेकर गंभीर है. श्री उपासने ने कहा कि प्रदेश सरकार ने डींगें हाँकते हुए समाजसेवी व स्वयंसेवी संगठनों पर प्रभावितों को सीधे सहायता पहुँचाने पर पाबंदी तो लगा दी लेकिन बदले में वह कोई बेहतर व्यवस्था विकसित नहीं कर पाई। इसी का नतीजा है कि प्रभावितों तक एक तो सहायता व राशन सामग्रियां पहुंच ही नहीं रही है, और जिन लोगों तक यह पहुँच रही है, उस सरकारी सहायता का क्रूर और बेहद शर्मनाक ज़मीनी सच सड्डू में शनिवार रात दिख चुका है. उन्होने कहा कि भाजपा द्वारा बताई गई खामियों को दुरुस्त करने के बजाय प्रदेश सरकार झूठे दावे करने और सियासी नौटंकियाँ करने में मशगूल है. जब राजधानी के कंटेनमेंट ज़ोन में प्रदेश सरकार और उसकी प्रशासनिक मशीनरी की कार्यप्रणाली इस कदर बदहाल है तो प्रदेश के दूरस्थ इलाकों की बदहाली और बदइंतज़ामी का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है.
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श्री उपासने ने कहा कि कंटेनमेंट ज़ोन के प्रति सरकार और प्रशासन की यह लापरवाही कोरोना संक्रमण के दौर में अक्षम्य है और प्रदेश सरकार को अपनी इस अमानवीय लापरवाही के लिए प्रदेश की जनता से माफी मांगकर तुरंत सत्ता छोड़ देनी चाहिए. इस प्रकरण से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश सरकार कोरोना महामारी की रोकथाम की इच्छा-शक्ति से पूरी तरह शून्य है और झूठी वाहवाही बटोरने की सियासी लफ्फाजियों से उबरने को तैयार नहीं है. इस सरकार को प्रदेश के जनजीवन से इस तरह खिलवाड़ करने नहीं दिया जा सकता. उन्होने कहा कि राजधानी की यही बदहाली और बदइंतज़ामी पूरे प्रदेश के क्वारेंटाइन सेंटर्स का भी ज़मीनी सच है, जिसके चलते इन सेंटर्स में आत्महत्या, सर्पदंश से मौत और लोगों के वहाँ से भाग जाने की घटनाएं एक सिलसिले के तौर पर रोज सामने आ रही हैं.







