रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि लॉकडाउन उठाने का निर्णय पूरी संवेदनशीलता और सावधानी के साथ लिया जाएगा. लॉकडाउन उठाने का निर्णय करते समय हमें जीवन और जीविका के बीच संतुलन रखना होगा. मुख्यमंत्री ने यह बात आज पत्रकारों से वीडियो कांन्फ्रेसिंग के माध्यम से चर्चा के दौरान कही. इस चर्चा में रायपुर, बस्तर, सरगुजा, बिलासपुर, दुर्ग संभाग के लगभग 55 प्रतिनिधियों ने भाग लिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि हमे अपने दिमाग में से सोशल डिस्टेन्सिग जैसे शब्दों की जगह फिजिकल डिस्टेन्सिंग को लाना होगा. यह बदलाव उन सामाजिक दूरियों जिनके प्रभाव पलायन से लौटे, काम पर वापिस आए मजदूर, पिछड़े तबके के लोगों के होने की संभावना है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन प्रेरित लॉकडाउन से भी आगे बढ़कर ग्राम की जनता ने स्वयं प्रेरित अनुशासन का लॉकडाउन का सफल प्रयोग किया है, जिसके लिए वे बधाई के पात्र हैं. एक प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा है कि निजामुददीन मरकज से छत्तीसगढ़ लौटे तबलीगी जमात के लोगों में कोई भी मिसिंग नहीं है.
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वहां से 107 लोग वापस आए थे. उन सबकी पहचान कर ली गई है. उन्हें क्वॉरंटाइन में रखा गया है तथा उनके सेम्पल ले लिए गए हैं. वे लोग जिनके सम्पर्क में आए थे ट्रेवल हिस्ट्री निकाली जा रही है. मुख्यमंत्री ने मीडिया प्रतिनिधियों के सवालों के जवाब में बताया कि प्रदेश में एम्स रायपुर और जगदलपुर के मेडिकल कॉलेज में कोरोना वायरस की टेस्टिंग की व्यवस्था है। अभी राजधानी रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में टेस्टिंग की अनुमति मिली है. हमारे पास क्वॉरंटाइन की व्यवस्था और पर्याप्त मात्रा में वेन्टिलेटर हैं. राज्य सरकार द्वारा टेस्टिंग किट के लिए टेंडर कर दिया गया है. जल्द ही किट भी उपलब्ध हो जाएंगे. नए केस मिलने के बाद कटघोरा में 100 प्रतिशत लॉकडाउन किया गया है. वहां सभी लोगों की जांच की जा रही है. कटघोरा में शत-प्रतिशत लोगों की टेस्टिंग की जाएगी. स्वास्थ्य विभाग को कोरोना संक्रमण के रेंडम जांच के निर्देश भी दिए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि कल प्रधानमंत्री की वीडियो कांन्फ्रेंस के बाद 12 अप्रैल को राज्य मंत्रीपरिषद की बैठक में चर्चा कर लॉकडाउन के बारे में निर्णय लिया जाएगा. उन्होंने बताया कि प्रदेश में चना, गेहूं की फसल को असमय ओलावृष्टि से काफी नुकसान हुआ है. अभी गेहूं की कटाई चल रही है. गर्मी की धान भी किसान ले रहे हैं. उन्होंने बताया कि प्रदेश में मनरेगा में पांच लाख मजदूर काम कर रहे हैं.
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