महासमुंद. एकता चौक शराब दुकान को आबकारी विभाग द्वारा रायपुर रोड में शिफ्ट करने के बाद यहां भी विरोध शुरु हो गया है. रविवार को दुकान खुलने की जानकारी मिलने के बाद नागरिक और नेताओं जमकर विरोध जताया. जिसके चलते दुकान नहीं खुल पाई और दुकान खोलने पहुंचे कर्मियों को वापस लौटना पड़ा. जानकारी के मुताबिक दुकान को विभागीय अमले ने रातों-रात शिफ्ट कर दिया और सुबह कर्मी दुकान खोलने के लिए पहुंच गए. दुकान से लगे त्रिमूर्ति कॉलोनी निवासियों को जब इसकी जानकारी हुई तो वे यहां विरोध में खड़े हो गए. उनके समर्थन में सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष के नेता भी विरोध करने के लिए पहुंचे. नागरिक और नेताओं के विरोध के चलते दुकान नहीं खुल पाई और कर्मियों को वापस लौटना पड़ा. आबकारी विभाग के रवैये को लेकर नागरिकों में आक्रोश व्याप्त है.
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मौके पर चल रहे विरोध के चलते आबकारी विभाग का कोई अफसर नजर नहीं आया. ना ही प्रशासनिक अधिकारी नजर आए. जिसकी वजह से लोगों में और अधिक आक्रोश बढ़ गया. लोगों का कहना है कि विरोध से बचने के लिए विभाग ने रातों-रात गुपचुप तरीके से दुकान शिफ्ट की है. जिसे लेकर नेताओं और नागरिकों में विभाग के प्रति अधिक आक्रोश व्याप्त है. बता दें कि एकता चौक शराब दुकान कल पुराने स्थान में हुए विरोध और संसदीय सचिव द्वारा नागरिकों के समर्थन में होने से नहीं खुल पाई थी. आज दुकान को एनएच 353 रायपुर रोड में त्रिमूर्ति कॉलोनी के पास शिफ्ट कर संचालित किए जाने से विरोध हुआ और दुकान नहीं खुल पाई. पूर्व विधायक विमल चोपड़ा का कहना है कि एकता चौक शराब दुकान की शिफ्टिंग कांग्रेस के दो गुटों की अंदरुनी लड़ाई का नतीजा है. अपने चहेतों को फायदा दिलाने के लिए ऐसा हो रहा है. दुकान का लंबे समय से विरोध है.
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लिहाजा सरकार को उक्त दुकान बंद कर शराबबंदी की घोषणा करनी चाहिए. जिसका स्वागत किया जाएगा. नपाध्यक्ष प्रकाश चंद्राकर का कहना है कि दुकान शिफ्ट करने की पालिका को सूचना ही नहीं दी गई है. मामले को लेकर उन्होने कलेक्टर व एसपी से बात की उन्हें भी दुकान शिफ्ट होने की जानकारी नहीं है. रही बात दुकान को रायपुर रोड में खोलने की तो यह जनहित को लेकर गलत है. शहर की बड़ी कॉलोनी आसपास मंदिर और अस्पताल है. जिससे माहौल खराब होगा. इसलिए वे इसके विरोध में हैं. प्रकाश चंद्राकर, दाऊलाल चंद्राकर, प्रमोद चंद्राकर, सोमेश दवे, गौरव जानी चंद्राकर, लोकेश चंद्राकर, रिंकू चंद्राकर सहित कॉलोनीवासी विरोध में उतर आए हैं.







