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‘कोरोना गाइडलाइन के पालन के लिए प्रताड़ना की हद तक जाने वाला प्रशासन सत्तारूढ़ दल के सामने रिरिया-मिमिया रहा’

Published on: December 20, 2020
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महासमुंद. भारतीय जनता पार्टी की महासमुंद ज़िलाध्यक्ष व पूर्व संसदीय सचिव रूपकुमारी चौधरी ने कांग्रेस नेताओं द्वारा सत्तावादी अहंकार में चूर होकर कोरोना प्रोटोकॉल व गाइडलाइन के ख़ुलेआम उल्लंघन पर अपनी गहरी नाराज़गी जताई है. उन्होने कहा कि कांग्रेस नेताओं और उनके परिजनों व कार्यकर्ताओं पर इस अपराध के लिए कोई कार्रवाई नहीं किया जाना इस बात का द्योतक है कि आम लोगों व विपक्ष के राजनीतिक कार्यकर्ताओं को क़ानून पालन की नसीहतें प्रताड़ना की हद तक जाकर देने वाला प्रशासन सत्तारूढ़ दल के सामने रिरियाता-मिमियाता है. श्रीमती चौधरी ने कहा कि कांग्रेस के विधायक व संसदीय सचिव विनोद चंद्राकर की अगुआई में अपनी प्रदेश सरकार की दूसरी सालगिरह मनाते कांग्रेस के लोगों ने जिस तरह कोरोना गाइडलाइन को अंगूठा दिखाने का काम किया है,

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वह कांग्रेस की उसी सियासी फ़ितरत का नमूना है जिसके चलते प्रदेश सरकार के मंत्री, कांग्रेस के जनप्रतिनिधि और नेता व कार्यकर्ता तक कोरोना संक्रमण की भयावहता को नज़रंदाज़ कर आम लोगों के जीवन से ख़ुला खिलवाड़ कर रहे हैं. उन्होने कहा कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण और धान बेचने के लिए हलाकान किसानों की त्रासदियों के बीच कांग्रेस की प्रदेश सरकार का अपनी दूसरी सालगिरह का आयोजन करना शर्मनाक राजनीतिक प्रदर्शन तो है ही, साथ ही ऐसे जलसों में मास्क धारण करने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के प्रति लापरवाही अक्षम्य है. श्रीमती चौधरी ने कहा कि कोरोना संक्रमण को लेकर प्रदेश सरकार के मंत्री, कांग्रेस के जनप्रतिनिधि, नेता व कार्यकर्ता शुरू से ही दुराग्रही रहे हैं और कोरोना गाइडलाइन का उल्लंघन करके इस तरह के आयोजनों को अपनी राजनीतिक पिपासा पूरी करने का मंच बना रहे हैं. उन्होने इस बात पर भी हैरत जताई कि महासमुंद विधायक व संसदीय सचिव विनोद चंद्राकर के पिता सेवनलाल चंद्राकर और विधायक प्रतिनिधि दाऊलाल चंद्राकर के लिए ज़ेल प्रशासन तक ने कोविड गाइडलाइन और अपने ही बनाए नियमों को ताक पर रखकर पिछले दिनों ज़ेल में बंदियों को केला वितरण करने की छूट दे दी, जबकि कोरोना काल में बंदियों से मुलाक़ात पर ज़ेल प्रशासन ने रोक लगा रखी है और परिजनों तक को ज़ेल में निरुद्ध बंदियों से पिछले 09 माह से मिलने नहीं दिया जा रहा है.

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श्रीमती चौधरी ने कहा कि कोरोना संक्रमण के चलते दिसम्बर महीने में जब 18 मौतें और 1185 संक्रमित मरीज मिले थे, ऐसे हालात में भी ज़ेल, ज़िला व पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे इस तरह जनजीवन के साथ खुला खिलवाड़ होना न केवल गंभीर विषय है, अपितु अक्षम्य अपराध है जिसके लिए सभी ज़िम्मेदार दोषियों की पहचान करके उन्हें क़ानूनन दंडित किया जाना चाहिए. उन्होने कहा कि जब सत्ताधीश ख़ुद ही कोरोना प्रोटोकॉल के पालन के प्रति अपने सत्तावादी अहंकार और दुराग्रह का प्रदर्शन करेंगे तो फिर आम लोगों को मास्क धारण करने व सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के लिए कैसे प्रेरित किया जाएगा. श्रीमती चौधरी ने ज़ेल, ज़िला और पुलिस प्रशासन की उदासीनता और नियमोल्लंघन के इन मामलों पर तुरंत संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की मांग की है.

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