रायगढ़. खाद्यान्न की बढ़ती कीमतों पर शासन-प्रशासन की अनदेखी समझ से परे है. शासन द्वारा पहले ही अत्यावश्यक सामानों की कीमतों का निर्धारण नहीं किया गया, वहीं जनप्रतिनिधि एवं अधिकारियों की उदासीनता से खाद्यान्न के भाव दिन प्रतिदिन अनियंत्रित होते जा रहे हैं. आंकड़े भले ही कुछ और बयां कर रहे हों, पर जमीनी हकीकत बता रही है कि लॉकडाउन और बेरोजगारी से त्रस्त आम आदमी महंगाई के भार से दबा जा रहा है. वहीं जिस प्याज ने तख्ता पलट दिया था, वह पुनः अपने तेवर दिखाता हुआ 15 रुपए से बढ़ता बढ़ता 60 के पार पहुंच चुका है. दाल और तेल की कीमतों में भी लगातार तेजी देखी जा रही है.
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बावजूद जनहित का दम भर रहे जनप्रतिनिधियों को हितैषी नीतियों के अनावश्यक विरोध से फुर्सत नहीं मिल पा रही. मुमकिन है प्याज की बढ़ी जलन आंखों के रास्ते बह ना जाए. बेलगाम हो रही कीमतों को लेकर पिछले सप्ताह जिला खाद्यअधिकारी सहित अन्य उच्चाधिकारियों से बात की गई, तो उनकी चिढ़ ने कुशंकाओं को जन्म देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी. वहीं इतने दिन बीत जाने के बाद भी अधिकारियों ने लगाम संभालने की कोई कोशिश भी नहीं की, यह बात किस ओर इशारा कर रही है यह लिखना जरूरी तो नहीं होगा. ऐसे में कालाबाजारी की धार तो बढ़ती चली जा रही है, वहीं आम आदमी महंगाई की मार से पिटा जा रहा है.
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