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‘जीवित किसान को मृत बताने और रकबा ग़ायब करने वाली प्रदेश सरकार किसानों से माफ़ी मांगे’

Published on: January 24, 2021
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रायपुर. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने आरंग के एक जीवित किसान को मृत बताने और रिकॉर्ड में उसकी कृषि भूमि का रकबा से ग़ायब कर दिए जाने के ताज़ा ख़ुलासे को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होने कहा कि धान ख़रीदी के आँकड़े जारी करके अपनी झूठी वाहवाही में मस्त सरकार पहले धान ख़रीदी के नाम पर किसानों के साथ छल-कपट करने से बाज आकर धान ख़रीदी के ज़मीनी सच की चुनौतियों से निपट ले, फिर प्रदेश सरकार की बड़बोली प्रवक्ता-मंडली भाजपा को कोई चुनौती देने का साहस दिखाए. श्री साय ने कहा कि धान ख़रीदी से बचने और किसानों को ख़ून के आँसू रुलाने के जितने षड्यंत्र प्रदेश की यह कांग्रेस सरकार रचने में लगी है, उसकी और कोई मिसाल देश में शायद ही देखने-सुनने को मिले.

रकबा कटौती और गिरदावरी के नाम पर किसानों को आत्महत्या तक के लिए विवश कर चुकी इस प्रदेश सरकार ने अब एक जीवित किसान को मृत बताकर और उसकी खेती के पूरे रकबे को ही रिकॉर्ड से ग़ायब करने जो कारनामा कर दिखाया है, उसके बाद तो अब इस सरकार को सचमुच अपने कृत्यों के लिए शर्मसार होकर अन्नदाता किसानों से बिना शर्त माफ़ी मांगकर अपनी विफलताओं को स्वीकार करके सत्ता छोड़ देनी चाहिए. उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार की धान ख़रीदी के आँकड़ों पर जो कांग्रेस इठला रही है, उसे सरकार के ज़रा वे आँकड़े भी सार्वजनिक करने चाहिए, जो मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, कृषि मंत्री और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के इलाकों व गृह ज़िलों में किसानों की आत्महत्या से जुड़े हैं. प्रदेश सरकार को उन आँकड़ों पर भी शर्म महसूस करनी चाहिए जो उसके नाकारापन और सियासी लफ़्फ़ाजियों को बेनक़ाब करने के लिए पर्याप्त हैं कि प्रदेश में पिछले वर्ष ख़रीदे धान में से लाखों मीटरिक टन धान सड़ गया.

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श्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार सैकड़ों करोड़ रुपए मूल्य की इस राष्ट्रीय सम्पदा की क्षति के अपराध पर शर्म महसूस करने के बजाय सियासी ओछेपन का परिचय देकर अपने निकम्मेपन पर पर्दा डालने में लगी है. उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार अपने फैलाए झूठ के रायते पर ख़ुद ही हर बार फिसलकर औंधे मुँह गिर रही है पर अपने सत्तावादी अहंकार में किसानों के साथ धोखाधड़ी की अपनी क़रतूतों से बाज आने का नाम नहीं ले रही है. श्री साय ने कहा कि रकबा को लेकर सामने आ रही शिकायतों निराकरण में भी प्रदेश सरकार और उसके अफ़सर पूरी तरह लापरवाही का परिचय दे रहे हैं ताकि अनसुलझे मामलों से जुड़े किसानों का धान ख़रीदने से प्रदेश सरकार बच जाए.

लेकिन प्रदेश सरकार और कांग्रेस के तमाम नेता 13 और 22 जनवरी के भाजपा के ज़बर्दस्त किसान सत्याग्रह के बाद इस ग़लतफ़हमी में क़तई न रहें कि किसानों के साथ झाँसेबाजी का यह खेल अब लंबा चल सकेगा. उन्होने कहा कि बदनीयत प्रदेश सरकार पहले किसानों के साथ छल-कपट करती है, फिर अपनी कुनीतियाँ लादकर किसानों को आत्महत्या के लिए बाध्य करती है और मृतक किसानों को मानसिक रोगी बताकर अपनी ज़िम्मेदारी से मुँह चुराती है और अब जीवित किसान को ही मृत बताकर उसकी खेती को ही ग़ायब करने में लगी है. श्री साय ने कहा कि सॉफ्टवेयर में आरंग के केवल किसान विजय निषाद का रकबा ही ग़ायब नहीं है, बल्कि कुल 36 किसानों के रकबे रिकॉर्ड से ग़ायब हैं. इन किसानों काफी पहले ही इसकी शिकायत दर्ज़ कराई थी, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते अब तक इन मामलों का समाधान नहीं होने के कारण किसान अपना धान नहीं बेच पा रहे हैं.

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उन्होने कटाक्ष किया कि अब मृत्यु प्रमाण पत्र की ज़गह प्रदेश सरकार किसान को अपने ज़िंदा होने को साबित करने के लिए चक्कर-पर-चक्कर खाने के मज़बूर कर रही है. प्रदेश सरकार समय रहते अपने रवैये और कार्यप्रणाली में सुधार ले आए, अन्यथा प्रदेश के किसान मौक़ा मिलते ही कांग्रेस को ही अपने वज़ूद के प्रमाण पत्र का मोहताज़ बना देंगे. श्री साय ने मांग की कि प्रदेश के जिन पंजीकृत किसानों का धान नहीं बिक पाया है, उनके लिए प्रदेश सरकार धान ख़रीदी की मियाद बढ़ाने की तत्काल घोषणा करके रकबा संबंधी किसानों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को मुस्तैद करे और इसमें लापरवाही करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करे.

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