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शिक्षित व ग्रामीण बेरोज़गारों की विवशताओं का राजनीतिक शोषण कर रही है प्रदेश सरकार : शर्मा

Published on: June 9, 2020
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रायपुर. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता व विधायक शिवरतन शर्मा ने छत्तीसगढ़ में बढ़ती बेरोज़गारी को चिंताजनक बताते हुए प्रदेश सरकार से जानना चाहा है कि रोज़गार की कमी से जूझते लोगों के लिए उसके पास क्या कार्ययोजना है? श्री शर्मा ने कहा कि सबको रोज़गार देने का वादा करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मज़बूती की डींगें हाँकने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के शिक्षित और ग्रामीण बेरोज़गारों की उम्मीदों पर पानी फेरने का काम ही किया है. श्री शर्मा ने मांग की है कि प्रदेश सरकार यह बताए कि लॉकडाउन से पहले प्रदेश में कितने बेरोज़गार थे और आज की स्थिति में बेरोज़गारों की संख्या कितनी है?

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श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश इन दिनों रोज़गार के अभूतपूर्व संकट से जूझ रहा है और प्रदेश सरकार के पास इससे निपटने की न तो कोई कार्ययोजना है, न कोई दृष्टिकोण है और न ही वह इस समस्या के समाधान के लिए कुछ सकारात्मक पहल का इरादा रखती है. श्री शर्मा ने कहा कि कोरोना-संकट के चलते जारी लॉकडाउन के कारण प्रदेश के व्यापारिक-औद्योगिक संस्थानों को बड़ी आर्थिक मार झेलनी पड़ी है. अब लॉकडाउन में छूट के बाद इन व्यापारिक-औद्योगिक संस्थानों में कार्यरत कई लोग छँटनी के कारण बेरोज़गार हो गए हैं. इधर, अन्य प्रांतों से लौटे प्रदेश के प्रवासी श्रमिकों के सामने भी रोज़गार की चिंता मुँह बाए खड़ी है. इस तरह प्रदेश में लाखों लोगों के सामने अब बेरोज़गारी का संकट है. उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार ने इन बेरोज़गारों के लिए तो कोई व्यवस्था नहीं ही की है, साथ ही प्रदेश के बेरोज़गारों के लिए उपलब्ध अवसरों को भी ख़त्म करने का काम इस प्रदेश सरकार ने किया है.

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प्रदेश में शिक्षाकर्मियों के 14,580 पद रिक्त हैं जिसके लिए 2.82 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा भी दी है और 05 नवंबर, 2019 को उसकी अंतिम सूची भी आ चुकी है लेकिन प्रदेश सरकार ने उसे लटकाकर रखा है. इसके लिए सोशल मीडिया पर ‘शिक्षक भर्ती ज़ल्दी करो’ ग्रुप बनाकर आंदोलन भी चलाया जा रहा है.  श्री शर्मा ने बताया कि इसी तरह पुलिस विभाग में भर्ती की प्रक्रिया को भी रोका गया. पुलिस महकमे के लिए 2,259 पदों पर भर्ती होनी थी. इसके लिए 29 दिसंबर, 2017 को विज्ञापन जारी हुआ था और 30 सितंबर, 2018 को परीक्षा ली गई थी और अभ्यर्थियों ने फिज़िकल टेस्ट भी पास किया था. बाद में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आने के बाद डीजीपी ने उक्त भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर दी थी.

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एक लंबी क़ानूनी लड़ाई के बाद न्यायालय ने भर्ती प्रक्रिया के पक्ष में फैसला दिया लेकिन प्रदेश सरकार ने अब तक इस दिशा में कोई पहल नहीं की है. श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के शिक्षित व ग्रामीण बेरोज़गारों की विवशताओं का राजनीतिक शोषण कर रही है. वर्ष 2020 की शुरुआत में पाँच हज़ार पदों के लिए नई नियुक्ति का जो ऐलान किया था, उसे दिशा में प्रदेश सरकार कोई पहल नहीं कर रही है. प्रदेश के शिक्षित बेरोज़गार युवकों को राज्य सरकार अपने वादे के बावज़ूद आज तक एक रुपया बेरोज़गारी भत्ता नहीं दिया है. उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार सरकारी नौकरियों में नई भर्ती रोककर बेरोज़गारी के संकट को भयावह कर रही है वहीं अब लॉकडाउन में छूट के बाद प्रवासी श्रमिकों की वापसी और व्यापारिक-औद्योगिक संस्थानों में छँटनी के कारण बेरोज़गार हुए लोगों की आजीविका के पुख़्ता इंतज़ाम सरकार ने नहीं किए हैं. श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार शेखी बघारने और झूठी वाहवाही बटोरने के बजाय ज़मीनी स्तर पर ईमानदारी के साथ कुछ ठोस काम करके दिखाए.
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