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खबर का असर : स्मिता ने उठाया सड़कविहीन बेलर का मुद्दा, सांसद और कलेक्टर ने दिया आश्वासन

Published on: November 7, 2020
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बागबाहरा. केन्द्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के जिले में क्रियान्वयन की समीक्षा हेतु सांसद चुन्नीलाल साहू की अध्यक्षता में जिला विकास समन्वय एवं मूल्यांकन समिति (दिशा) की बैठक शनिवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में सम्पन्न हुई. बैठक में विधायक एवं संसदीय सचिव विनोद चंद्राकर, खल्लारी विधायक संसदीय सचिव द्वारकाधीश यादव सहित अन्य सदस्यगण बैठक में उपस्थित थे. विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी और जिले के जनपद पंचायत अध्यक्ष वीडियो काँफ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए. सभी ने योजनाओं, आवश्यकता, क्षेत्र की समस्याओं से सांसद, विधायक, कलेक्टर को अवगत कराया. बागबाहरा जनपद अध्यक्ष स्मिता हितेश चंद्राकर ने पहुंचविहीन मार्ग अरंड-बेलर एवं चरौदा-जुनवानी पहुंच मार्ग का मुद्दा उठाया. उन्होने जल्द सड़क निर्माण की स्वीकृति देने कहा.

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सांसद और कलेक्टर ने अगामी बजट में उक्त मार्ग की स्वीकृति का विश्वास दिलाया. ज्ञात हो कि गत दिनों ‘छत्तीसगढ़ जनादेश’ ने उक्त समस्या पर खबर प्रकाशित कर जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन का ध्यानाकृष्ठ कराने का प्रयास किया था. जिससे जनपद अध्यक्ष स्मिता हितेश चंद्राकर ने विगत सप्ताह महासमुंद जिला पंचायत की सामान्य सभा बैठक में उक्त सड़क का मुद्दा उठाया था तब लोक निर्माण विभाग ने भी सड़क बनाने सर्वे कर स्वीकृति हेतु शासन तक प्राक्कलन तैयार कर भेजने की बात कही. अध्यक्ष ने सांसद तथा विधायक से खल्लारी क्षेत्र के पहुंचविहीन तथा कच्ची मार्गों को डामरीकृत करने स्वीकृति दिलाने की मांग की है. जनपद अध्यक्ष ने मनरेगा में हुए भ्रष्टाचार की जांच और सरपंचों एवं मजदूरों का लंबित भुगतान करने कलेक्टर से आग्रह किया. उल्लेखनीय है कि 98 फीसदी अनुसूचित जनजाति वर्ग की आबादी वाला गांव बेलर आज भी सड़क का मोहताज है.

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यह गांव जिला मुख्यालय से महज 20 किमी की दूरी पर है. यहां अधिकांश ध्रुव, गोंड़, कमार जाति के लोग निवासरत हैं पर इन आदिवसियों की समस्या जानने वाला कोई नहीं है. यह गांव तीन तरफ से पहाड़ों एवं भूस्वामी भूमि से घिरा हुआ है. गांव के लोग पगडंड़ियों के रास्ते बारहों माह आना-जाना करते हैं. ग्रामीण बरसात में नारकीय जिंदगी जीने विवश होते हैं. ग्रामीणों को पांच किलोमीटर दूर पंचायत मुख्यालय राशन के लिए जाना पड़ता है. बेलरवासी विकास से कोसों दूर हैं. यहां विकास के नाम से एक आंगनबाड़ी, प्राथमिक स्कूल ही है. ग्रामीणों के सार्वजनिक काम के लिए एक भी सामुदायिक भवन नहीं है. यहां की समस्या जानने न कोई अधिकारी आते और न ही कोई जनप्रतिनिधि.

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