पिथौरा. 14वें-15वें वित्त मद से लाखों की गड़बड़ी के आरोप में निलंबित बोइरलामी सचिव को पुन: बहाल करने की खबर ‘छत्तीसगढ़ जनादेश’ में प्रकाशन के बाद शुक्रवार को जिला पंचायत ने सचिव वृंदावन विश्वकर्मा को पुन: निलंबित कर दिया है. ज्ञात हो कि खबर प्रकाशन के बाद उक्त सचिव ने अपने एक पंचायत सचिव मित्र राजेन्द्र सोनी को बगैर कोई दस्तावेज दिए ही प्रभार सौंप दिया था. पर, गुरुवार शाम जांच अधिकारी टीम द्वारा दस्तावेज मांगे जाने पर श्री सोनी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके. सचिव वृंदावन विश्वकर्मा के विरूद्ध जांच कर रही टीम को अब उक्त सचिव ही जांच की तारीख देने लगे हैं. ग्रामीण सूत्रों के अनुसार गुरुवार शाम उक्त मामले हेतु गठित जांच टीम ग्राम बोइरलामी पहुंची.
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ग्राम में नए प्रभार लिए सचिव राजेन्द्र सोनी भी पूरी तरह पूर्व में निलंबन बहाली का खेल खेल रहे वृंदावन विश्वकर्मा की तरह ही निकले. श्री सोनी ने जांच टीम को बताया है कि उन्होंने पंचायत में रखे कुर्सी-टेबल, बैंक पासबुक, चेक बुक ही प्रभार में उन्हें दी है. शेष कोई दस्तावेज प्रभार में नहीं दिए गए. जिस पर टीम ने वृंदावन को तत्काल तलब किया. बहाल होने के बाद उत्साह से भरे सचिव विश्वकर्मा ने खुद जांच का सामना करने की बजाय एक नेता की धौंस देते हुए टीम को उनसे बात करने कहा. जब टीम ने यह बताया गया कि वे जिला पंचायत सीईओ के निर्देश पर निष्पक्ष जांच करने आए हैं, तब वृंदावन ने उल्टे जांच टीम को ही जांच की तारीख दे दी. उन्होंने जांच टीम को 3 अक्टूबर को आने के लिए कहा है.
अधूरा प्रभार, जनपद में भी यही जमा : जांच टीम
इधर, जांच टीम के प्रमुख रेशमलाल भारती ने बताया कि पूर्व में निलंबित होकर पुन: बहाल हो चुके सचिव ने नए सचिव राजेन्द्र सोनी को पूरा प्रभार नहीं सौंपा है. प्रभार के समय मौके पर सरपंच को नहीं बुलाया गया. आधे-अधूरे वित्त विहीन प्रभार की कॉपी भी जनपद कार्यालय में जमा करवाई गई है. पूरे मामले की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जिला पंचायत भेज दी गई है.
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तीन तारीख को ग्रामीणों को बुलाया गया : सोनी
विकासखण्ड के विवादित पंचायत सचिव वृंदावन विश्वकर्मा सभी वित्तीय दस्तावेज पंचायत के सामने 3 अक्टूबर को रखेंगे. लिहाजा इसकी जानकारी पूरे ग्राम पंचायतवासियों को दे दी गई है. ज्ञात हो कि श्री सोनी ने सरपंच को बगैर बुलाए बगैर आवश्यक दस्तावेज लिए ही नियमविरूद्ध प्रभार ले लिया. यहां तक कि उन्होंने इस असंवैधानिक प्रभार की कॉपी भी जनपद में जमा करवाई है. जब कि जानकर बताते हैं कि प्रभार की कॉपी का निरीक्षण किए बगैर जनपद कार्यालय में प्रभार कॉपी जमा नहीं की जाती, पर उक्त मामले में सभी मामले शिथिल कर दिए गए.

ऊंची पहुंच के कारण उत्साहित थे सचिव
ग्रामीणों से चर्चा करने पर यह बात सामने आई कि पंचायत सचिव लगातार 9 वर्षों से एक ही ग्राम पंचायत बोइरलामी में पदस्थ हैं. यहां अपनी ऊंची पहुंच के चलते वे पंचायत के अनेक मद की राशि ऑनलाइन महिला सरपंच के डिजिटल हस्ताक्षर से निकालते रहे हैं. इसकी शिकायत भी ग्रामीण लगातार करते रहे हैं. इनके विरुद्ध अनेक जांच आदेश भी जारी हुए, पर जांच अधिकारी के ग्राम में जांच हेतु पहुंचने के पूर्व ही इस सचिव के प्रभाव से जांच टीम को बैरंग लौटना पड़ता था. पर, इस बार पूरी जानकारी ‘छत्तीसगढ़ जनादेश’ में प्रकाशन के बाद उच्च अधिकारियों के यहां हुए काले कारनामों की जानकारी हुई और तत्काल कार्रवाई भी की गई. अब देखना यह होगा कि अपनी ऊंची पहुंच वाले सचिव को प्रशासन कितने दिन निलंबित रख पाता है.
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