खरसिया. सच है आस्था किसी भी बाधा को हंसते-हंसते पार कर जाती है. मन में आस्था हो तो पथरीली राहें भी फूलों की तरह सजी हुई जान पड़ती हैं. कुछ ऐसा ही वाकिया शनिवार दोपहर देखने को मिला. सात किलोमीटर तक कर नापते हुए संतोषी महंत ग्राम फगूरम से गायत्री शक्तिपीठ पहुंची. यूं तो कहने के लिए 7 किलोमीटर कोई बड़ा सफर नहीं, परंतु रास्ते में ग्राम मुड़पार से रायगढ़ चौक तक उबड़-खाबड़ सड़क चन्द्र धरातल को भी पीछे छोड़ती, बड़े-बड़े गड्ढों से अटी पड़ी है. इस सड़क पर पैदल चलना भी दूभर है, वहीं संतोषी महंत ऐसे 5 किलोमीटर तक कर नापते हुए सहजता से माता के दरबार पहुंच गई, वास्तव में यह आस्था श्रद्धा व भक्ति की पराकाष्ठा ही तो है.
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माता की इस भक्त का साथ देने के लिए सोहन महंत, उर्मिला महंत, वीरेंद्र महंत, सावन महंत, रसीला बाई, सावित्रीबाई, कृष्ण कुमार, इतवारीन बाई, कचरा बाई, तरुणी बाई, दीपक दास और नीरा महंत व अन्य लोगों की लगन भी प्रशंसनीय है, जो मांदर मंजीरे के साथ माता का जस-गान करते हुए गायत्री शक्तिपीठ तक आए. ऐसे में शक्तिपीठ के मुख्य प्रबंधक शिवधन अग्रवाल, पंचराम निषाद गुरुजी एवं हरी डनसेना ने माता की इस भक्त का पुष्प वर्षा से अभिनंदन किया. वहीं उपस्थित सभी ने जगज्जननी से संतोषी की मनोकामना पूर्ण करने के लिए प्रार्थना की.
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