महासमुंद/खरसिया. प्रेम हो या पीड़ा इसका एहसास इंसानों की तरह जानवरों को भी होता है. ठंडी गर्मी और बारिश तो यह बेजुबान कराहते हुए सह भी लेते हैं, परंतु भूख तो बहुत व्याकुल कर देती है. हालांकि छत्तीसगढ़ सरकार ने इनके लिए कहीं-कहीं पर गौठान की व्यवस्था कर तो दी है, पर जहां इंसानों को भी अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए ऑफिस दर ऑफिस भटकना होता है, वहां इन बेजुबानों की जरूरतों का कितना खयाल रखा जाता होगा, यह आप बेहतर समझ सकते हैं. हर गांव हर शहर में भूखे प्यासे भटकते मवेशी आप भी तो देखेते ही होंगे. वहीं मैं दो ऐसे नाम बता रहा हूं, जिन्होंने इन बेजुबानों के चेहरे पर अंकित मौन के दर्द को पढ़ा है.
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चेंबर ऑफ कॉमर्स महासमुंद के अध्यक्ष शंभू साहू और खरसिया के युवा कांग्रेसी नेता सुनील शर्मा के द्वारा लॉकडाउन के दौरान भूखे प्यासे भटक रहे इन बेजुबानों के लिए प्रतिदिन बड़ी मात्रा में ताजी हरी सब्जियों की सेवा दी जा रही है. सुबह से ही सब्जियों की व्यवस्था कर ली जाती है, वहीं दोपहर शाम तक इन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में कटिंग कर राहों में भूखे प्यासे भटक रहे गौवंश के लिए स्नेहपूर्वक परोसा जा रहा है. लॉकडाउन समाप्त होने के बाद क्या फिर यह भूखे प्यासे ही घूमेंगे. इस बात के जवाब में श्री साहू और श्री शर्मा ने एक ही जवाब दिया कि अब यह क्रम नहीं टूटेगा. निस्संदेह इन मूक प्राणियों की व्यथा को समझ जाना और लाखों इंसानों की भीड़ से अलग हटकर इनकी भूख मिटाना ना सिर्फ प्रशंसनीय है वरन् अनुकरणीय भी है.
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