खरसिया. पंचायत सचिवों की बेमियादी हड़ताल से गांवों में विकास का पहिया थम सा गया है. मनरेगा, गौधन योजना आदि कई तरह की योजनाएं ग्रामीण क्षेत्र में संचालित हैं, जो पंचायत सचिवों के बिना प्रभावित हो रही हैं. वहीं विकास कार्यों में लगी सरपंचों की रकम मार्केट में फंसी है, जो बगैर कार्य कराए मिल पाना मुश्किल है. ऐसे में सरपंच भी किसी भी तरह से सचिवों की हड़ताल समाप्ति की कामना कर रहे हैं, लेकिन पंचायत सचिव अपनी मांग को लेकर अड़े हुए हैं. इसके अलावा बुनियादी सुविधाएं भी प्रभावित हुई हैं.
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बहुत सी पंचायतों में पंचायत सचिव के माध्यम से पीडीएस राशन का संचालन किया जाता है. वहीं कई तरह के पेंशन भी लटक गए हैं. कुल मिलाकर देखा जाए तो गांवों का कामकाज पूरी तरह प्रभावित हुआ है. सचिव संघ के प्रवक्ता देवप्रसाद पांडे ने बताया कि रोहित पटेल, जागरदास महंत, शौकीदास महंत, मुकेश नेताजी, बाबूलाल राठिया, विजय चौधरी, माधव डनसेना, लक्ष्मण पटेल, रामप्रसाद डनसेना, रामाधार डनसेना, अश्वनी पटेल सहित प्रदेश के सभी पंचायत सचिव लगातार चौथे दिन धरने पर बैठे हुए हैं, जो मांग पूरी हुए बिना धरने से उठने को तैयार नहीं है.
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