विष्णुचंद्र शर्मा
खरसिया. निकाय चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष से उम्मीदवारों के बीच हो रही रस्साकशी के बीच नामांकन की अंतिम तिथि तक चार वार्डों में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पा रही. वहीं भाजपा के पास तो प्रत्याशियों के टोटे भी पड़ गए. मंत्री के गृहनगर खरसिया के चुनावी रण में अब दोनों ही प्रमुख पार्टियों द्वारा अपने-अपने चक्रव्यूह बनाए जा रहे हैं. ऐसे में अपनी-अपनी ढपली पर अपने-अपने राग अलापते हुए सभी गुट पूरी ताकत से जोर आजमाइश कर रहे हैं. मंत्री पटेल के नियंत्रण से गुटों में बटे कार्यकर्ताओं पर कुछ लगाम तो है, परंतु विपक्ष का बिखराव साफ तौर पर दिखने लगा है. वार्ड नंबर 16 के लिए प्रत्याशियों की कतार के बीच किसी एक को चुनना कांग्रेस के लिए सरदर्द बन गया है. वहीं वार्ड नंबर 11 के लिए भाजपा को प्रत्याशी नहीं मिल रहे.
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दरअसल, कांग्रेस की रणनीति के तहत 15 वर्षों से सक्रिय राजनीति से दूर रहे संटी सोनी को अपराजेय योद्धा बंटी सोनी का प्रतिद्वंदी बनाए जाने पर ना सिर्फ वार्ड नंबर 11 का समीकरण बिगड़ा, साथ ही भाजपा लगभग 5 वार्डों से डगमगा गई. बताना लाजिमी होगा कि बंटी एवं संटी सगे भाई एवं मृदुल स्वभाव के धनी होते हुए समाज सेवा के लिए सक्रिय रहते हैं. वहीं चर्चा इस बात पर भी हो रही है कि भले ही सत्ता पक्ष को पार्षदों का बहुमत मिल जाए, परंतु अप्रत्यक्ष रूप से हो चयनित रहे अध्यक्ष पद के लिए उनके पास कोई भी ठोस चेहरा नहीं. हालांकि सत्ता पक्ष पूरे भरोसे और उत्साह के साथ निकाय चुनाव के लिए तैयार दिख रहा है. जबकि विकास कार्यों के बावजूद गुटों में बटी भाजपा में जीत के गीत का सुर-ताल बिगड़ गया है.







