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कोमाखान, खल्लारी में उप तहसील, बागबाहरा में रजिस्ट्री और व्यवहार न्यायालय की हो स्थापना : स्मिता

Published on: November 12, 2020
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बागबाहरा. जनपद अध्यक्ष स्मिता हितेश चन्द्राकर ने कहा कि खल्लारी क्षेत्र को एक बार फिर छला गया है. कांग्रेस सरकार ने 23 नवीन तहसीलों के शुभारंभ के साथ 4 पुरानी तहसीलों के कार्यालय भवन निर्माण और एक-एक वाहन की मंजूरी की घोषणा भी की. वहीं 27 तहसीलों के लिए कार्यालय निर्माण के लिए कुल 19 करोड़ 20 लाख रुपए और सभी तहसील कार्यालयों में एक-एक वाहन की व्यवस्था के लिए कुल 1.75 करोड़ रुपए की घोषणा की है. उन्होने कहा कि महासमुंद लोकसभा और खल्लारी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने लंबे समय तक प्रतिनिधित्व किया है पर खल्लारी क्षेत्र का जैसा विकास होना था वैसा नहीं हो पाया है. पूर्व की भांति इस बार भी प्रदेश सरकार ने खल्लारी विधानसभा क्षेत्र को उपेक्षित किया है. महासमुंद जिला क्षेत्र का विकासखण्ड बागबाहरा के सबसे पुराना राजस्व निरीक्षक मंडल खल्लारी एवं कोमाखान वर्तमान में बागबाहरा तहसील क्षेत्र में है.

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कोमाखान व खल्लारी के तहसीलदार शहरी मुख्यालय में बैठते हैं. इन दोनों क्षेत्र के ग्रामीणों को राजस्व संबंधित काम के लिए बागबाहरा आना पड़ता है जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है. लंबे समय से कोमाखान और खल्लारी को उप तहसील का दर्जा देकर उपतहसील न्यायालय की स्थापना किया जाना था पर वर्तमान आदेश में इन दोनों जगह का नाम नहीं होने से लोगों को निराशा हाथ लगी है. कोमाखान एवं खल्लारी में थाने की स्थापना की गई. इन थाना क्षेत्र में कोई चालान प्रस्तुत करना होता है तो पुलिस को आरोपियों को बागबाहरा लाना पड़ता है वहीं किसानों को अपनी जमीन संबंधी काम के लिए बागबाहरा आना पड़ता है. यदि इन दोनों जगहों पर नायब तहसीलदार कार्यालय की स्थापना कर दी जाती तो लोगों को सुलभ न्याय मिलने की गुंजाइश बढ़ जाती पर ऐसा हुआ नहीं. यही नहीं, बागबाहरा में लंबे समय से व्यवहार न्यायालय और रजिस्ट्री कार्यालय खोलने की मांग लंबित है उस पर सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है. अध्यक्ष स्मिता ने कहा कि बागबाहरा ब्लॉक के 243 गांवों के लोगों को 50-65 किलोमीटर सफर तय कर जिला मुख्यालय महासमुंद में रजिस्ट्री और न्यायालय संबंधित काम के लिए जाना पड़ता है.

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बागबाहरा को अनुविभाग का दर्जा दिया गया है पर यहां अनुविभागीय कार्यालय का निर्माण नहीं किया गया है. उन्होने कहा कि खल्लारी विधानसभा हर क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है चाहे वह शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई या उद्योग हो. यहां के विद्यार्थियों को साइंस, कृषि की पढ़ाई करनी हो तो राजधानी जाना पड़ता है. तहसील मुख्यालय में एक भी सर्जन डॉक्टर नहीं है वहीं दस बिस्तर के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में डॉक्टर का अभाव है. बेरोजगार युवक-युवतियों के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के साधन नहीं है. वहीं सिंचाई का कोई नया संसाधन यहां स्वीकृत नहीं किया जा रहा है. जनपद अध्यक्ष स्मिता चंद्राकर ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि खल्लारी क्षेत्र के उपेक्षित   कोमाखान और खल्लारी में नायब तहसील प्रारंभ किया जाए, बागबाहरा में रजिस्ट्री और व्यवहार न्यायालय की स्थापना करें ताकि यहां के लोगों को भी राहत मिल सके.

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