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गौठानों में हो रहा उच्च गुणवत्तायुक्त केंचुआ खाद का उत्पादन

Published on: March 18, 2021
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महासमुंद/पिथौरा. प्रदेश सरकार की गोबर खरीद कर वर्मी कम्पोस्ट खाद निर्माण कर विक्रय कर जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाने की योजना सफल हो रही है. जिले के गौठनों में बनाई जा रही खाद अब किसान भी पसंद करने लगे हैं. गोधन न्याय योजना अंतर्गत जिले के गौठनों में केंचुआ खाद का उत्पादन किया जा रहा है. इस सम्बंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डॉ. रवि मित्तल ने बताया कि गौठानों में तैयार की जा रही केंचुआ खाद अच्छी गुणवत्ता की है. ग्राम पंचायत बम्हनी स्थित गौठान में भी केंचुआ खाद का उत्पादन हो रहा है, जिसमें केंचुआ खाद में कार्बनिक कार्बन की मात्रा 23.83 प्रतिशत तक पाई गई है, जो कि उच्च गुणवत्ता की केंचुआ खाद मानी जा सकती है.

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इसकी जानकारी कृषि विज्ञान केन्द्र भलेसर के मृदा वैज्ञानिक कुणाल चन्द्राकर द्वारा दी गई है. डॉ. मित्तल ने बताया कि ग्राम बम्हनी स्थित गौठान में समूह की महिलाओं ने अभी तक 320 क्विटल केंचुआ खाद तैयार किया है. पूरे खाद की निजी संस्थाओं, स्थानीय किसानो और सरकारी कार्यालयों द्वारा ख़रीदी की गई है. समूह की महिलाओं को इस कार्य से 2 लाख 30 हज़ार रुपए की आमदनी हुई है. ज़िला कृषि वैज्ञानिकों ने इस संबंध में बताया कि गौठानों में तैयार की जा रही वर्मी जैविक खाद में कार्बनिक कार्बन की मात्रा अधिक होने पर मृदा में फसलों के लिए आवश्यक मुख्य पोषक तत्व नत्रजन की मात्रा भी बढ़ती है. केंचुआ खाद में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व-नत्रजन, स्फुर, पोटाश, कैल्शियम, मैग्निशियम, कॉपर, आयरन, जिंक, सल्फर भी पाए जाते हैं. जो कि मृदा की उर्वरता को बढ़ाने के साथ-साथ फसल उत्पादन बढ़ाने में भी सहायक होते हैं. केंचुआ खाद को अनाज, दलहन, तिलहन, सब्जियां एवं फलदार पौधे सभी प्रकार की फसलों में उपयोग किया जा सकता है.

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वर्तमान समय में मृदा स्वास्थ्य को बढ़ाने के लिए समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन तकनीक को अपनाने की आवश्यकता है जिसमें फसलों में रासायनिक उर्वरकों के उपयोग के साथ जैविक खाद का भी उपयोग करना चाहिए, जिससे पौधों के पोषक आवश्यकता की पूर्ति हो एवं मृदा स्वास्थ्य में भी सुधार हो. केंचुआ खाद का उपयोग करने से मृदा की जलधारण क्षमता में वृद्धि होती है. मृदा की भौतिक स्थिति में सुधार होता है, मृदा में पोषक तत्वों की मात्रा में वृद्धि होती हैं एवं मृदा उर्वरता तथा मृदा स्वास्थ्य में भी सुधार होता है. वर्तमान समय में मृदा स्वास्थ्य के सुधार हेतु जैविक खाद के रूप में केंचुआ खाद का उपयोग कृषकों के लिए बहुत अच्छा विकल्प है.

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