रायपुर. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने कोरोना आपदा काल में भी बरती जा रही संवेदनहीनता और धांधलियों के लिए प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि प्रदेश सरकार की नाक के नीचे राजधानी में कोरोना संक्रमितों के उपचार के नाम पर निजी अस्पतालों में लूट मची है और प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है. उन्होने कहा कि निजी स्कूलों की फीस को लेकर विधेयक लाकर दखल देने वाली प्रदेश सरकार निजी अस्पतालों में इलाज की राशि तय करने से पल्ला झाड़कर अपने दोहरे मापदंड का प्रदर्शन कर रही है. प्रदेश सरकार निजी अस्पतालों में इलाज की राशि तय कर उसकी मॉनीटरिंग करे ताकि कोरोना संक्रमितों लूट-खसोट से बच सकें.
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श्री उपासने ने कहा कि प्रदेश की राजधानी के ज़िला अस्पताल में आसन्नप्रसवा महिला को तड़प-तड़कर प्रसव करना पड़ रहा है, प्रदेश के कोविड सेंटर की दो अलग-अलग जाँच में एक ही व्यक्ति की एक ही दिन में पहले पॉज़ीटिव और बाद में निगेटिव रिपोर्ट आ रही है. ये घटनाएं साबित कर रही हैं कि प्रदेश सरकार कोरोना संक्रमण को रोकने के मामले में पूरी लापरवाही दिख रही है, संवेदना तो उसकी मर चुकी प्रतीत हो रही है. उन्होने कहा कि प्रदेश में कोरोना के ख़िलाफ़ जारी ज़ंग को कैसे गलत दिशा में ले जाया जा रहा है, इसकी मिसाल रायगढ़ में देखने को मिली है. वहाँ सिंधी कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति ने सेंट्रल स्कूल के पास स्थित कोविड सेंटर में अपनी जाँच कराई जहाँ उसे कोरोना पॉज़ीटिव बताया गया. बिना किसी लक्षण के कोरोना पॉज़ीटिव बताए जाने पर उस व्यक्ति ने उसी दिन उसी समय जिंदल फोर्टिस अस्पताल में जाँच कराई और दो घंटे बाद उसे मिली रिपोर्ट निगेटिव थी. श्री उपासने ने कहा कि वह व्यक्ति अब इस ऊहापोह में है कि वह किस रिपोर्ट पर भरोसा करे. इधर, सीएमएचओ ने यह कहकर कि, तीसरी जाँच फिर कराएंगे तो वह पॉज़ीटिव ही निकलेगा, चिकित्सकीय मर्यादा को ताक पर रख दिया है.
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प्रदेश सरकार और मेडिकल काऊंसिल को इस पूरे मामले की जाँच करके तथ्यों को सामने लाना चाहिए और दोशियों पर ज़रूरी कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होने राजधानी के कालीबाड़ी ज़िला अस्पताल में शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात में एक आसन्नप्रसवा महिला को कोरोना संक्रमित पाकर अस्पताल से ही निकाल दिए जाने की घटना को संवेदनहीनता की पराकाष्ठा माना है. वह महिला काफी देर तक ज़मीन पर दर्द से तड़पती रही लेकिन डॉक्टर्स-नर्सेस ने ज़रा भी मानवता नहीं दिखाई और अंतत: उस महिला ने ज़मीन पर ही तड़प-तड़कर शिशु को जन्म दिया. उसके बाद अस्पताल प्रबंधन मामले की लीपापोती करने हरक़त में आया. जानकारी तो यह भी शर्मनाक है कि अस्पताल प्रबंधन अब पीड़ित परिवार को धमका रहा है कि अगर इस मामले का वीडियो सामने आया तो उनके ख़िलाफ़ एफआईआर करा दी जाएगी.
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— Cg Janadesh (@CJanadesh) August 31, 2020







