रजिंदर खनूजा
पिथौरा. क्षेत्र से दीगर प्रांतों में दलालों द्वारा ले जाए जा रहे करीब 130 मजदूरों को पटेवा पुलिस ने पकड़ने में सफलता प्राप्त की है. पुलिस मामले को श्रम विभाग को सौंपने की बात कह रही है जबकि स्थानीय विधायक पलायन के उक्त मामले में मानव तस्करी का मामला मानकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. अब देखना होगा कि पुलिस पूर्व की तरह दलालों को सहयोग करती है या कोई बड़ी वैधानिक कार्रवाई करेगी. ज्ञात हो शुक्रवार रात एक शिकायत के बाद उत्तर प्रदेश की बस UP JT39 में कुल 130 स्थानीय मजदूरों को उत्तरप्रदेश के ईंट भट्ठे में ले जाते पटेवा पुलिस ने पकड़ा. कुछ मजदूरों ने उन्हें पिथौरा के दो भट्ठा दलालों द्वारा ले जाने की बात बताई. वहीं आश्चर्यजनक पहलू यह है कि इन लाचार मजदूरों को यह भी नही पता कि उन्हें उत्तरप्रदेश के किस शहर के किस भट्ठा में छोड़ा जाएगा.
इन मजदूरों को मवेशियों की तरह बस में लादकर ज्यादा कमीशन देने वाले ईंट भट्ठा मालिक के अधीन छोड़ दिया जाएगा. मजदूरों के बयान से इस बात का अंदाज़ आसानी से लगाया जा सकता है कि मजदूरों को किसी मवेशी की तरह बेचा जाता है. ज्ञात हो कि शासन द्वारा पलायन रोकने प्रतिवर्ष कठोर कानून सहित इसके लिए श्रम विभाग के साथ पुलिस राजस्व विभाग एवं स्थानीय जन प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाता है. परन्तु आर्थिक चकाचौंध से किसी भी संबंधित विभाग को पलायन तभी दिखता है जब कोई महत्वपूर्ण हस्ती इसकी सूचना देती है. अन्यथा किसी अन्य माध्यम से सूचना मिलने पर भी विभाग इनसे काफी दूर ही रहता है. जिससे पलायन कराए जाने वाले मजदूर भेड़-बकरी की तरह लदकर अपने गंतव्य तक आसानी से पहुंच जाते हैं.
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एक हजार ईंट में 450 रुपए कमीशन
मजदूरों को पलायन कराने का काम अब एक उद्योग की तरह बन गया है. भट्ठों से मजदूरों के लिए एडवांस पहुंचाने आने वाले कुछ भट्ठा से संबंधित बताते हैं कि अब ईंट भट्ठों में एक हजार ईंट बनाने की मजदूरी 1000 से 1250 रुपए तक दी जा रही है. ये राशि भट्ठा मालिकों द्वारा दलालों से हिसाब में दी जाती है. परन्तु दलाल मजदूरों को प्रति हजार ईंट निर्माण हेतु मजदूरी 550 से 600 रुपए तक ही देकर हिसाब करते हैं. इसमें भी मजदूरों को भट्ठा के करीब बनी झोपड़ी का किराया, कच्ची खाद्य सामग्री सहित किराया भाड़ा भी काटकर हिसाब किया जाता है.
एक मजदूर ने प्रताड़ना से बचने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि उनको प्रतिवर्ष जाना ही पड़ता है क्योंकि वे वापसी के दौरान भट्ठा में हिसाब के बाद चंद रुपए के साथ वापस घर आते हैं. परन्तु घर आते ही उन्हें घर की मरम्मत एवं अन्य आवश्यक कार्यों के लिए रुपए की जरूरत होती है जिसे पूरा करने वे फिर से मजबूरी में भट्ठा दलाल के पास जाते हैं और 10-50 हजार रुपए तक उधार ले आते हैं और अपना काम चलाते हैं.
10 का ब्याज 20 हजार
भट्ठा जाने वाले मजदूरों की आप बीती रोंगटे खड़े कर देने वाली है. भट्ठा दलालों द्वारा मजदूरों को दी जाने वाली प्रताड़ना तालिबान स्टाइल में होती है. मजदूर ने बताया कि यदि किसी मजदूर ने दलाल से 10 हजार रुपए लिए हैं तब तो उसे हर हालत में सपरिवार मजदूरी करने जाना ही पड़ेगा अन्यथा उससे 10 का 30 हजार रुपए देने की मांग की जाएगी. यदि फिर भो मजदूर तैयार नहीं होते तब उन्हें अन्य मजदूरों के सामने तालिबानी तरीके से प्रताड़ना दी जाती है जिससे प्रताड़ित मजदूर तो स्वेच्छा से जाने को तैयार होता ही है इसके अलावा प्रताड़ना देख रहे अन्य मजदूर भी इतने सहम जाते हैं कि वे भी कथित स्वयं से दलालों के साथ सपरिवार अपने मासूम बच्चों के साथ जाने के लिए तैयार रहते हैं.
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मंत्री-अधिकारियों के बयान अखबारों तक सीमित
पलायन के मामले में मंत्रियों एवं प्रशासनिक अफसरों के बयान मात्र अखबारों तक ही सिमटते दिखते हैं. विगत अनेक वर्षों से प्रदेश के मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों सहित अफसरों के भी अक्सर पलायन नहीं होने देने के बयान देखे जा सकते हैं. बावजूद प्रतिवर्ष मात्र महासमुंद जिले से ही 50 हजार से अधिक मजदूर भट्ठा दलालों के चंगुल में आसानी से फंसते हैं और भययुक्त माहौल में प्रताड़ित जीवन जीने को मजबूर हैं. इस संबंध में मजदूर खुलकर कभी शिकायत भी नहीं कर पाते क्योंकि शिकायत करने वाले मजदूर जेल तक भेज दिए जाते हैं लिहाजा अब मजदूर खुलकर कुछ बोलने की बजाय प्रताड़ना को ही अपनी नियति समझ अपना जीवन काट रहे हैं. ज्ञात हो कि हाल ही में श्रम मंत्री ने पिथौरा प्रवास में पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा था कि गैर पंजीकृत मजदूरों के पलायन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
यूपी चुनाव प्रभावित करने ले जा रहे
इधर, क्षेत्रीय विधायक विनोद चंद्राकर ने मीडिया से कहा कि इन मजदूरों को उत्तर प्रदेश चुनाव तक रोककर इनसे फर्जी वोटिंग कराई जाएगी. मजदूर दलालों पर मानव तस्करी का मामला दर्ज किया जाए.
दलालों के पास अनुमति का पता लगा रहे
एसडीओपी विनोद मिंज ने पत्रकारों को बताया कि 130 मजदूरों से भरी बस को पकड़कर पूछताछ की गई जिसमें भट्ठा दलाल जेके गुप्ता का नाम सामने आ रहा है. श्रम विभाग से पता लगाया जा रहा है कि दलालों के पंजीयन हैं या नहीं. पंजीयन हैं तो मजदूरों को ले जाने की प्रक्रिया की गई है या नहीं. इसकी जानकारी के बाद ही कार्रवाई की जाएगी. बहरहाल, प्रदेश सरकार के श्रम मंत्री एवं स्थानीय विधायक संसदीय सचिव के मजदूरों के पलायन नहीं होने देने संबंधी खुले बयान के बाद भी हो रहे पलायन में पकड़े गए मजदूर एवं मजदूरों के बयान के बाद उजागर हुए बयान में सामने आए भट्ठा दलालों पर भी पुलिस कार्रवाई करने में जिस तरह हीलाहवाला करती दिख रही है उससे मंत्री एवं संसदीय सचिव की प्रशासनिक पकड़ भी सामने आ गई है.
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