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पंचायत अधिनियम दरकिनार, बिना अध्यक्ष-उपाध्यक्ष निर्वाचन प्रथम सम्मिलन की तैयारी!

Published on: February 8, 2020
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रजिंदर खनूजा

पिथौरा. स्थानीय निकाय चुनावों के तहत निगम पालिकाओं के सफल निर्वाचन के बाद अब पंचायत निर्वाचन में शासन स्तर पर पंचायत अधिनियम को किनारे कर देने से वैधानिक संकट की संभावना व्यक्त की जा रही है. ज्ञात हो कि पंचायत अधिनियम के अनुसार पंचायतों का प्रथम सम्मिलन में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष द्वारा कार्यभार ग्रहण कर अपना कार्यकाल प्रारंभ किया जाता है परंतु वर्तमान घोषित कार्यक्रम के अनुसार बगैर अध्यक्ष-उपाध्यक्ष निर्वाचन के ही प्रथम सम्मिलन कराया जाना है. जानकर सूत्रों के अनुसार पंचायत चुनाव में पंचायतों के उपसरपंच एवं जनपद पंचायत के लिए अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के निर्वाचन पहले कराए जाने थे परंतु शासन द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार महासमुंद जिले को छोड़कर शेष जिलों में प्रथम सम्मिलन 11 फरवरी और इसके बाद 24 फरवरी को उपसरपंचों सहित जनपद एवं

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जिला पंचायत के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के निर्वाचन की तिथि तय की गई है. सूत्र बताते हैं कि पंचायत अधिनियम के नियम 90 के तहत त्रिस्तरीय पंचायतों के निर्वाचन संपन्न करवाने के बाद निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों के नाम को विधिवत अधिसूचित कर दिया गया है. इसके बाद शासन स्तर पर पंचायत अधिनियम की धारा 17, 25 एवं 32 के तहत उपसरपंच, जनपद के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष एवं जिला पंचायत के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के निर्वाचन हेतु कार्यक्रम घोषित कर पहले निर्वाचन सम्मिलन एवं निर्वाचन के बाद धारा 19, 26 एवं धारा 33 के तहत निर्वाचित पदाधिकारियों के नामों का प्रकाशन विहित प्राधिकारी द्वारा प्रकाशित किया जाता है. इसके बाद पंअ 1993 की धारा 20, 27 एवं 34 के तहत प्रकाशन के 30 दिन के भीतर ग्राम पंचायत, जनपद एवं जिला पंचायतों का प्रथम सम्मिलन आयोजित किया जाता है.

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जो कि ग्राम पंचायत सचिव, जनपद एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा आयोजित किया जाएगा और इसी दिन से नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का कार्यकाल विधिवत प्रारंभ होता है. ज्ञात हो कि इस बार चुनाव में पंचायत राज अधिनियम के तहत निर्वाचन नहीं कराए जाने से भविष्य में वैधानिक संकट की स्थिति आ सकती है. इस संबंध में कुछ निर्वाचित प्रतिनिधियों ने बताया कि प्रथम सम्मिलन में जब कोई पदाधिकारी ही निर्वाचित नहीं रहेगा ऐसी स्थिति में इस सम्मिलन में उपसरपंच, अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का प्रभार कैसे होगा. जानकारों के अनुसार पंचायत अधिनियम का पालन जब शासन स्तर पर ही नहीं किया जा रहा तब अधिनियम के अन्य प्रावधानों का पालन भी आखिर कौन कराएगा. इस संबंध में राज्य ग्रामीण विकास संस्थान के सदस्य से मोबाइल पर चर्चा का प्रयास किया गया पर उन्होने मोबाइल रिसीव नहीं किया.

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1995 से महासमुंद में नियमानुसार ही होते हैं कार्यक्रम : सूत्रों के अनुसार 1995 के पंचायत चुनावों में भी उक्त अनुसार ही प्रथम सम्मिलन आयोजित करने का कार्यक्रम था. पर तत्कालीन जनपद में पदस्थ पंचायत निरीक्षक एसके डड़सेना ने इस चूक की जानकारी कलेक्टर को दी थी. गलती देख कर इसे महासमुंद जिला कलेक्टर ने सुधार कर पहले निर्वाचन करवाकर 30 दिन के भीतर प्रथम सम्मिलन करवाने का निर्देश दिया था. तभी से महासमुंद जिले में नियमानुसार ही कार्यक्रम होते हैं. शेष प्रदेश में अधिनियम के विपरीत ही कार्यक्रम हो रहे है.
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