रजिंदर खनूजा
पिथौरा. पिरदा सहकारी समिति द्वारा धान खरीदी में व्याप्त बेतहासा अनियमितताओं की अंततः गुरूवार को दूसरी बार जिला पंचायत अध्यक्ष की उपस्थिति में एसडीएम ने जाँच की. कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार एवं अन्य पांच अधिकारियों की टीम ने जाँच की. इस जांच में पूर्व में स्थानीय तहसीलदार द्वारा दी गई क्लीन चिट के विपरीत भारी गड़बड़ी सामने आई. ज्ञात हो कि कोई हफ्ते भर पहले जिस सोसायटी को तहसीलदार पिथौरा की अगुवाई में पांच सदस्यीय जाँच अफसरों ने शिकायत की जांच में धान खरीदी मसले पर क्लीन चिट दे दी थी. गुरुवार को मौके पर शिकायतकर्ताओं की उपस्थिति में की गई जाँच में वहां 5 हजार क्विंटल से अधिक धान की कमी पाई गई. साथ ही धान खरीदी हेतु शासन से निर्धारित अन्य मापदण्डों का भी खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन होना पाया गया.
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सवा करोड़ से अधिक की इस अफरा-तफरी पर परदा डालने की कोशिशों में लगे सहकारी अफसरों को उस समय तगड़ा झटका लगा जब जिला पंचायत अध्यक्ष उषा पटेल अपने कार्यकर्ताओं के साथ जाँच स्थल पहुंचीं और जाँच होते तक वहीं डटी रहीं. उन्होने बताया कि पिथौरा से अफसरों की टीम ने इस चर्चित धान सोसायटी का जाँच करते वक्त यह भी देखा कि खरीदी के अन्य मापदण्डों का भी पालन नहीं किया गया है. पानी निकासी की उचित व्यवस्था का सर्वथा अभाव पाया गया. अमानक धान की खरीदी की गई है. श्रीमती पटेल ने बताया कि दिलचस्प बात यह है कि प्रथम जाँच और द्वितीय जाँच की दरम्यानी अवधि में सोसायटी के कार्यकताओं ने साढ़े तेरह हजार बारदानों की व्यवस्था कर उच्चधिकारियों के सहयोग से मामले को दबाने का भरसक प्रयत्न किया. श्रीमती पटेल को जो स्वयं शिकायतकर्ता हैं और जिन्होंने स्थल का निरीक्षण कर प्रशासन के संज्ञान में इस मामले को लाया, उन्हे बारदानों की भरती पर संदेह हुआ. उन्होंने जाँच अधिकारियों से बारदानों का तौल कराने की मांग की. उनकी मांग पर जब तौल कराया गया, तो सभी बोरों में धान कम पाया गया और करोड़ों रुपए का घोटाला सामने आया. बारदानों में 20-25 किलो की भर्ती कर गिनती पूरी करने का प्रयास किया गया था.
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यह भी उल्लेखनीय है कि मामले पर परदा डालने की हर संभव कोशिश की गई. इस कोशिश में खरीदी किए गए क्वालिटीयुक्त धान के बोरों में खुले में पड़े सड़े-गले और अमानक धान को मिला कर बारदानों में पेकिंग की गई थी, जिससे चार करोड़ से अधिक की क्षति पहुँचाई गई है. ज्ञात हो कि श्रीमती पटेल ने कार्यकर्ताओं की मांग पर पिरदा धान खरीदी सोसायटी में हुई अनियमितताओं की जाँच की मांग की थी. जिस पर कलेक्टर के निर्देश पर पांच सदस्यीय टीम का गठन किया गया. जांच में गए तहसीलदार एवं उनकी टीम ने अपनी जाँच रिपोर्ट में क्लीन चिट दे दी थी. कलेक्टर ने दोबारा जाँच के आदेश दिए जिसके बाद करोड़ों का घोटाला उजागर हुआ. अब श्रीमती पटेल गलत जांच कर आरोपी अधिकारी-कर्मियों का साथ देने वाले अफसरों पर कठोर कार्रवाई की मांग कर रहीं हैं.
मॉकड्रिल कर एम्स से भद्दे मजाक के लिए राज्य सरकार हाथ जोड़कर माफी मांगे : सोनी https://t.co/c7TF8OKxcU pic.twitter.com/90QY8ofK1W
— Cg Janadesh (@CJanadesh) April 30, 2020







