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दिवाली के दिन सिख मनाते हैं बंदी छोड़ दिवस

Published on: October 24, 2022
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रजिंदर खनूजा

पूरे भारत में दीपावली मनाने का कारण भगवान श्रीराम का चौदह वर्षों के वनवास से वापस अयोध्या लौटने को माना जाता है. पर, सिख धर्म मानने वाले दीपावली को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाते हैं. जानकारों के मुताबिक सिखों के 6वें गुरु हरगोविंद राय ने इसी दिन चंगुल से 52 हिन्दू राजाओं को मुक्त करवाया था. बताया जाता है कि मुगलों ने जब मध्य प्रदेश के ग्वालियर के किले को अपने कब्जे में लिया तो उन्होंने इसे जेल में तब्दील कर दिया था. इस किले में मुगल सल्तनत के लिए खतरा माने जाने वाले लोगों को कैद कर रखा जाता था.

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बादशाह जहांगीर ने यहां 52 राजाओं के साथ 6वें सिख गुरु हरगोबिंद साहिब को कैद कर रखा था. जानकार बताते हैं कि जहांगीर को सपने में एक रूहानी हुक्म के कारण गुरु हरगोबिंद साहिब को रिहा करने पर मजबूर होना पड़ा था. जब मुगल बादशाह को अपनी गलती का अहसास हुआ, तो उन्होंने हरगोबिंद साहिब से लौटने का आग्रह किया. बाद गुरु साहिब ने कहा कि वह अकेले नहीं जाएंगे. उन्होंने कैदी राजाओं को भी मुक्त कराने की बात कही. जिस पर मुगल बादशाह ने शर्त रखी थी. बाद गुरु साहिब के लिए 52 कली का चोला (वस्त्र) सिलवाया गया. 52 राजा जिसकी एक-एक कली पकड़कर किले से बाहर आ गए. इस तरह उन्हें कैद से मुक्ति मिल सकी थी.

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दिवाली के दिन दरबार साहिब में हुआ था आगमन

इतिहास के अनुसार दीपावली के दिन ही गुरु हरगोविंद सिंह के साथ सभी 52 राजाओं का दरबार साहिब अमृतसर आगमन हुआ था. आगमन पर इनके स्वागत के लिए पूरे अमृतसर को दीयों से सजाया गया था. सभी ओर आतिशबाजी के साथ युद्ध कौशल का प्रदर्शन भी किया गया था. तभी से सिख समाज देश-विदेश में दिवाली के साथ दाता बंदी छोड़ दिवस के रूप में भी मनाते आ रहे हैं. चूंकि दीपावली मां लक्ष्मी की पूजा का सबसे बड़ा पर्व है. लिहाजा सिख धर्मावलम्बी भी दाता बंदी छोड़ दिवस के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं रख पाए.

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