पारस सांखला
बागबाहरा. अवर्षा से धान के पौधे सूख रहे हैं. खेतों में दरारें पड़ रही है. क्षेत्र में अकाल की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भिलाईदादर के किसान अपनी फसलों को मवेशियों के हवाले करना प्रारंभ कर दिए हैं. सप्ताहभर बाद अनेक गांव के किसान बारिश के अभाव में मरते धान की फसल को मवेशियों को चराने विवश होंगे. खल्लारी विधानसभा क्षेत्र को प्रदेश का सबसे पिछड़ा हुआ कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. इस क्षेत्र में सिंचाई साधन का बेहद अभाव है इसलिए प्रति वर्ष प्रायः सूखा, अकाल की स्थिति निर्मित होती है.
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यहां के किसान लंबे समय से नदी-नाले में डायवर्सन एवं सिंचाई जलाशय बनाने की मांग पुरजोर तरीके से करते आ रहे हैं पर किसानों की मांग को क्षेत्र से चुनकर गए सांसद, विधायक कभी भी दमदारी से सदन में नहीं रखे इसलिए राज्य सरकार ने खल्लारी क्षेत्र को कोई महत्व नहीं दिया. यहां के जनप्रतिनिधि सिंचाई योजना को बजट मे भी शामिल नहीं करा पाए हैं. खरीफ सीजन 2021-22 में ऐसी विकराल समस्या खड़ी हुई है जिसने क्षेत्र के किसानों की कमर तो तोड़ी ही है साथ ही यहां के किसानों की आर्थिक अर्थव्यवस्था को भी हिलाकर रख दिया और एक बार फिर से खल्लारी में कमजोर मानसून ने किसानों को भीषण सूखा, अकाल की ओर धकेल दिया है. वर्षा ऋतु के प्रारंभ से ही खण्डवृष्टि का होना किसानों के लिए नुकसानदेह साबित हुआ है. छत्तीसगढ़ में 2000 में जो अकाल पड़ा था उससे भी भीषण अकाल की स्थिति वर्तमान में बन गई है.
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खल्लारी क्षेत्र के ओड़िशा सीमावर्ती नदी तट पर बसे गांव खट्टी, सेनभांठा, झिटकी, परसुली, परकोम, बहेराभांठा, नर्रा, बिंद्रावन, अमेरा, उखरा, सिवनी, सोनामुदी, टेमरी, कर्रीडीह, साल्हेभाठा, डोंगाखम्हरिहा, कुसमी, छिबर्रा, कोचर्रा, सीमगांव, खेमड़ा, डोंगरगांव, खुड़मुड़ी, डोंगरीपाली, रेवा, मोंगरापाली सहित सैकड़ों गांव जोंक नदी के तट पर बसे हैं बावजूद यहां की धरती प्यासी है. इसी तरह क्षेत्र में सैकड़ों छोटे-बड़े नाले हैं उसमें पानी रोकने के लिए कोई ध्यान नहीं दिया गया. खल्लारी से अनेक बार विधायक सरकार का हिस्सा रहे बावजूद सिंचाई के लिए ठोस रणनीति नहीं बना पाए. इधर, बिजली समस्या के कारण साधन संपन्न किसान फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं. लो-वोल्टेज व बिजली कटौती चहुंओर से सुनाई दे रही है बावजूद विभागीय अधिकारी तथा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के कानों में जूं नहीं रेंग रही है.







