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किशनपुर सामूहिक हत्याकांड की अब होगी सीबीआई जांच, हाईकोर्ट का आदेश

Published on: March 26, 2022
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पिथौरा. क्षेत्र के ग्राम किशनपुर में 31 मई 2018 को हुए सामूहिक हत्याकांड की जांच अब उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद सीबीआई करेगी. ज्ञात हो कि तात्कालिक पुलिसिया जांच से पीड़ितों के परिजन संतुष्ट नहीं थे. लिहाजा उन्होंने पूरे मामले की जांच सीबीआई से करवाने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी. 31 मई 2018 को किशनपुर में पदस्थ स्वास्थ्य विभाग की एएनएम योगमाया साहू, पति चैतन्य साहू, एवं इनके दो मासूम बच्चों तन्मय साहू, कुणाल साहू की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी.

इस मामले में पिथौरा पुलिस द्वारा पकड़े गए सभी 5 आरोपी न्यायिक रिमांड पर महासमुंद जेल में हैं. पुलिसिया जांच एवं कार्रवाई से मृतक परिवार संतुष्ट नहीं थे. लिहाजा मृतक के पिता बाबूलाल साहू द्वारा अपने वकील राघवेंद्र प्रधान के जरिए हाईकोर्ट में सीबीआई जांच की अपील की गई थी. मामले की सुनवाई के दौरान प्रथम बेंच जज गौतम भादुड़ी की बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार को सीबीआई जांच के आदेश दे दिए. इधर, उक्त मामले में उच्च न्यायालय ने पहले ही 10 जून 2022 को जिला न्यायालय को आदेश देते हुए अंतिम फैसले में रोक लगाई गई थी.

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क्या है पूरा मामला

2018 की 30-31 मई की दरम्यानी रात बारिश और अंधड़ के बीच पिथौरा थाना क्षेत्र के किशनपुर में उक्त एएनएम योगमाया साहू को उसके पति एवं 2 बच्चों सहित कुछ बदमाशों ने मौत के घाट उतार दिया था. इस मामले में पुलिस ने गांव के धर्मेन्द्र बरिहा को गिरफ्तार किया था. बाद परिजनों ने पिथौरा पुलिस से आरोपी धर्मेन्द्र बरिहा का नार्को टेस्ट कराने की मांग की. जिस पर पुलिस ने आरोपी का नार्को टेस्ट कराया. नार्को टेस्ट में गांव के तत्कालीन सरपंच सुरेश खुंटे, फूलसिंग यादव, गौरीशंकर केंवट और रामपुर के अखंडल प्रधान का नाम सामने आया था.

बाद पुलिस ने इन्हें अप्रैल 2019 में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. वर्तमान में सभी आरोपी जेल में निरुद्ध हैं. पहले पुलिस ने मात्र धर्मेंद्र बरिहा को ही आरोपी बनाकर मामला उजागर करने का दावा किया था पर परिजन पुलिस कार्रवाई से असंतुष्ट थे. लिहाजा वे आरोपी धर्मेंद्र का नार्को टेस्ट की मांग करते रहे पर पुलिस ने उनकी मांग को नजर अंदाज कर दिया. पर मृतकों के परिजन अपनी मांग के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के जनदर्शन पहुंच कर नार्को टेस्ट की मांग की थी. जिस पर डॉ. रमन सिंह ने नार्को टेस्ट एवं मामले की पुनः जांच हेतु एसआईटी का तत्काल गठन कर दिया था. इसके बाद धर्मेंद्र का नार्को टेस्ट करवाया गया.

जिसमें उसने अनेक नाम उगले पर पुलिस द्वारा नार्को रिपोर्ट छिपाने से मृतकों के परिजनों का संदेह और बढ़ गया. परिजन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अन्य सभी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर कार्रवाई की मांग करते रहे. इसके लिए इस परिवार से बाबूलाल साहू, तुलसीराम साव एवं राजेश चौधरी आंदोलन एवं प्रदर्शन के साथ पूरे मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच की मांग करते रहे पर कहीं भी सुनवाई नहीं हुई. तब उन्होंने न्याय के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी. जिसका फैसला शुक्रवार को सुनाकर पूरे मामले की जांच सीबीआई से करवाने निर्देशित किया गया है.

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