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अब तो लाश ने भी बता दिया, अब भी लूटी जा रही है रेत संपदा

Published on: July 9, 2021
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महासमुंद. सोमवार तड़के तुमगांव थाना क्षेत्र में बड़गांव के रास्ते ट्रैक्टर पलट जाने से एक युवक की मौत हो गई. पुलिस ने घटना की पूरी ईमानदारी से विवेचना की और मीडिया को भी साफ़गोई से बताया कि रायपुर जिले के आरंग के लोधी पारा निवासी चंद्रकांत लोधी अपने मित्र के साथ ट्रैक्टर में सवार होकर ‘रेत भरने बड़गांव जा रहा था’. तेज रफ्तार ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर खेत में पलट गया और उसमें दब जाने से चंद्रकांत की मौत हो गई. पुलिस का यह ईमानदार विवेचना गौर करने लायक है. वरना सत्ताधीशों के दबाव में जिला प्रशासन और उसका खनिज विभाग जिस तरह रेत की लूट के तमाम मामलों व खबरों को जानबूझकर नजरअंदाज करते रहा है, ऐसी सूरत में पुलिस को भी कुछ और कहानी बनानी पड़ जाती.

पुलिस को कहनी पड़ जाती कि ‘खुद ट्रैक्टर ही ट्रॉली के साथ रात में आरंग से भाग गया था और  खुदकुशी करने बड़गांव रेत घाट जा रहा था. चंद्रकांत और उसके साथी तो ट्रैक्टर को किसी तरह रोकने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन ट्रैक्टर माना ही नहीं और तेज रफ्तार से भागते हुए खेत को ही नदी समझ कर उसमें जा पलटा.‘ पुलिस ने ऐसी कोई कहानी नहीं गढ़ी, सच बयां किया है. ख़बरनवीस तो प्रशासन को लगातार सच बता रहे हैं, पर प्रशासन मानता नहीं है, अब तो लाश ने भी बता दिया. इस घटना और पुलिस की विवेचना के बाद यह बात फिर साबित हो गई कि शासन के आदेश के बाद भी महानदी के बड़गांव और बरबसपुर रेत घाट में खनन बंद नहीं हुआ है, बल्कि यहां रेत का अवैध खनन, अवैध परिवहन और अवैध भंडारण बदस्तूर जारी है. जेसीबी मशीनें लगाकर दिन-रात रेत खनन किया जा रहा है. बताया जाता है कि बरबसपुर में जगह-जगह रेत के अवैध स्टॉक हैं. यहां खेतों और खलिहानों में भी रेत डम्प की गई है और की जा रही है. वहीं बड़गांव के रेत घाट तक हाइवा ट्रकों और ट्रैक्टरों की लाइन लगी होती हैं. रेत माफियाओं को संरक्षण देने वाले सत्ताधीशों ने जिला प्रशासन व उसके खनिज विभाग को उधर आंख तक उठाने नहीं दिया.

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ऐसे में सवाल उठता है, पुलिस ने कैसे ईमानदारी से विवेचना कर यह बता दिया कि ट्रैक्टर में दबकर मरा युवक अपने साथी के साथ रेत भरने बड़गांव जा रहा था? इससे तो जिला प्रशासन पर ही सवाल खड़े होते हैं कि वह एनजीटी के दिशा-निर्देशों व शासन के आदेश का पालन नहीं करा पा रहा. बेशक पुलिस ने ईमानदार विवेचना की है, लेकिन बदले हालात में कुछ रेत माफियाओं की रणनीति भी यही है कि बरबसपुर व बड़गांव रेतघाट से रेत निकासी फिलहाल बंद हो जाए. कारण यह है कि रेत माफियाओं ने महानदी से दिन-रात रेत लूटकर बिरकोनी, बरबसपुर, घोड़ारी, परसवानी सहित महासमुंद क्षेत्र में कई और स्थानों पर रेत का अवैध स्टॉक कर रखा है, जिसे ज्यादा रेट में बेचकर ज्यादा मुनाफा कमाने की मंशा उनकी है. रेत घाट बंद होंगे तो वैध-अवैध स्टॉकों से रेत उठेगी.

रेत घाट चालू रहेंगे तो ज्यादा रेट में स्टॉक से रेत कैसे उठेगी? लेकिन बड़गांव और बरबसपुर रेत घाट पर सीधे दखल रखने वाले रेत माफिया और इन गांवों के कतिपय मुखिया शासन के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए वर्षाकाल में भी नदी से रेत लूटने में लगे हुए हैं. इनकी देखा-देखी ट्रैक्टर वाले भी मजदूर लेकर उमड़ रहे हैं. ज्यादा से ज्यादा ट्रिप करने की उनमें होड़ मच रही है. इस कारण भी ट्रैक्टर बेहद रफ्तार से चलते हैं. नदी की रेत से अच्छी मजदूरी की लालसा में इसी तेज रफ्तार का शिकार हो गया चंद्रकांत लोधी. वह आरंग का रहने वाला था, इसलिए महासमुंद जिला प्रशासन को कोई फर्क नहीं पड़ता. अगर वह महासमुंद जिले का होता तब भी शायद कोई फर्क नहीं पड़ता. घटनाओं से, खबरों से जिला प्रशासन को अगर फर्क पड़ता तो बहुत कुछ हो जाता. हां, दिखावे के लिए कभी-कभी कार्रवाई करने का उपक्रम जरूर किया जाता है. अगर सच में कार्रवाई की मंशा होती तो कलेक्टर द्वारा गठित जांच टीम कहीं कार्रवाई करती नजर भी आती. कलेक्टर ने रेत के अवैध खनन, परिवहन व भंडारण की रोकथाम के लिए महासमुंद ब्लॉक में राजस्व, खनिज और पुलिस विभाग की 2 संयुक्त टीमें बनाई हैं.

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इन टीमों का गठन हुए 15 दिन से अधिक हो चुके हैं, हैरानी की बात है कि 15 दिनों बाद भी एक भी जांच दल जिला मुख्यालय से महज 15 किमी दूर बिरकोनी तक भी नहीं पहुंच पाया. जांच दल को पहुंचने में क्या 15 साल लगेंगे? क्या जिला प्रशासन मजबूर है? खनिज संपदा रेत के अवैध खनन, भंडारण, परिवहन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या अनुमति से अधिक रेत का स्टॉक करने वालों को रेत बेचकर स्टॉक कम करने का मौका दे रहे हैं? या उन्हें मौका दे रहे हैं जो बिना परमिशन रेत का पहाड़ खड़े किए हैं? अगर ऐसी बात नहीं तो उन अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, जो इस हालात के लिए जिम्मेदार हैं? प्रावधान तो ऐसे पंचायत प्रतिनिधियों को पद से पदच्युत किए जाने का भी है, जो खनिज संपदा के सम्बंध में अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं. लेकिन जब प्रशासन ही मजबूर है, तो…

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