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‘बिलासपुर ही नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ में सभी विभागों के लिए काम के एवज में रेट लिस्ट टांगने जारी हो निर्देश’

Published on: November 11, 2020
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बागबाहरा. पूर्व जनपद अध्यक्ष नरेन्द्र चंद्राकर ने कहा है कि समय-समय पर विपक्षी दल के नेताओं द्वारा कमीशनखोरी का आरोप लगाया जाता रहा है उस आरोप को बिलासपुर विधायक ने पुख्ता कर दिया है. उन्होने कहा सिर्फ बिलासपुर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के सभी विभागों के लिए काम के एवज में पैसा लेने का रेट लिस्ट टांगने निर्देश जारी करवा दिया जाना चाहिए ताकि प्रदेश के लोगों को मालूम चल सके कि किस काम का कितना  दाम देना होगा. ऐसे कर दिए जाने से नागरिकों को किसी नेता के दरबार में जी हुजूरी नहीं करनी पड़ेगी. चन्द्राकर ने कहा है कि विधायक ने गृहमंत्री और स्पेशल डीजीपी पुलिस की ऑनलाइन उपस्थिति में थाना भवनों के लोकार्पण कार्यक्रम में सार्वजनिक रूप से पुलिस के द्वारा प्रत्येक काम के लिए घूस की मांग करने पर सभी थाना में रेट लिस्ट टांगने की मांग गृहमंत्री से की.

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वर्तमान परिस्थितियों के मद्देनजर यह मांग जायज है जिसे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को तुरंत पूरा करना चाहिए. विधायक शैलेष पांडेय सत्तारूढ़ दल के विधायक हैं. जरा सोचिए जब उनकी यह पीड़ा है तो सामान्य नागरिक से किस प्रकार व्यवहार होता होगा. आज पूरे प्रदेश में लूटपाट मची हुई है. धान बिक्री से लेकर धान का चुकारा तक के लिए किसानों को पैसा देना पड़ता है. राजस्व विभाग, आबकारी विभाग, पंचायत विभाग, वन विभाग के अधिकारी निरंकुश हो चुके हैं नियम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही है. श्री चंद्राकर ने कहा कि वे पांडेय की मांग का समर्थन करते हैं. उन्होने कहा कि राजस्व विभाग में मुफ्त में फौती, नामांतरण, भाई बंटवारा जैसे कार्यों में भी कमीशनखोरी जमकर की जाती है.

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राशि नहीं देने पर लोगों का काम वर्षों तक नहीं हो पाता. इसी प्रकार केन्द्रीय योजना के तहत शत-प्रतिशत अनुदान में बनने वाले प्रधानमंत्री आवास में भी कमीशनखोरी की जा रही है. इसी कमीशनखोरी के चलते शौचालय निर्माण की राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है. आज भी 30 प्रतिशत ग्रामीण आबादी को शौचालय निर्माण का भुगतान नहीं हो पाया है. ग्रामीण जन शिकायत कर-कर थक गए पर कोई भी जनप्रतिनिधि, अधिकारी ने इस मामले की तह तक जाने ध्यान नहीं दिया. जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से कमीशनखोरी सिर चढ़ कर बोल रही है. नेताओं को आम जन से कोई सारोकार नहीं रहा है.

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