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10 माह से मानदेय नहीं, रसोइयों ने नहीं बनाया मध्याह्न भोजन

Published on: November 9, 2021
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पारस सांखला

बागबाहरा. रसोइयों को दस माह (फरवरी से नवंबर) से मानदेय नहीं मिला है, जिससे वे परेशान हैं. जानकारी के मुताबिक 10 मई 2021 को राज्य शासन से रसोइया मानदेय और सामग्री भुगतान के लिए विकासखण्ड शिक्षा कार्यालय को एक करोड़ तेइस लाख उनचालीस हजार पांच सौ बियालीस रुपए जारी हुआ था. उक्त राशि 14 सितंबर को राज्य शासन को वापस भेज दी गई. अधिकारी का कहना है कि शासन से राशि वापस भेजने का आदेश आने पर भेजी गई है. मानदेय के लिए विद्यालय के प्रधानाध्यापक से लेकर खंड शिक्षा अधिकारी व क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से भी गुहार लगा चुकी रसोइयों ने अब आंदोलन का रूख अख्तियार कर लिया है. रसोइया संघ संभागीय अध्यक्ष नीलू ओगरे ने बताया कि बागबाहरा खंड में मंगलवार से मध्याह्न भोजन बनाना बंद कर दिया गया है. गुरुवार से पूरे जिले में मध्याह्न भोजन नहीं बनाया जाएगा.

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रसाइयों का कहना है कि वैसे भी उन लोगों को माह में महज 1200 रुपए ही मिलता है. समय से रुपए न मिलने से घर चलाने में दिक्कत होती है. उन्हें दीपावली से पहले मानदेय मिलने की उम्मीद थी लेकिन प्रशासनिक अमले की लापरवाही और शासन की उदासीनता के चलते त्योहार मायूसी में गुजरा है. उल्लेखनीय है कि 10 मई 2021 को राज्य शासन से रसोइया मानदेय और सामग्री भुगतान के लिए विकासखण्ड शिक्षा कार्यालय को एक करोड़ तेइस लाख उनचालीस हजार पांच सौ बियालीस रुपए प्राप्त होने के बाद भी मानदेय और सामग्री का भुगतान क्यों नहीं किया गया. राशि जारी होने के बाद भी भुगतान नहीं करना घोर लापरवाही को दर्शाता है. अब उक्त राशि 14 सितंबर 2021 को विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी द्वारा राज्य शासन को वापस भेज दी गई. विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी से मानदेय भुगतान करने की मांग को लेकर मंगलवार को दर्जनभर रसोइया ब्लॉक कार्यालय पहुंचीं थीं.

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रसोइयों को गोल-मोल जवाब देकर विकासखण्ड शिक्षाधिकारी ने पल्ला झाड़ लिया. इसी तरह मध्याह्न भोजन के लिए महिला स्वसाहयता समूह द्वारा स्कूलों में सामग्री प्रदान की जाती है उन्हें जून महीने से अब तक 6 महीने से सामान की राशि भुगतान नहीं की गई है. राशन सामान का भुगतान समय पर नहीं करने से उन्हें ब्याज अदायगी करना पड़ता है जिससे उन्हें काफी नुकसान होता है. उन्हें जो आमदनी बचनी चाहिए वह ब्याज के एवज में दुकानदार को देना पड़ जाता है. समूह का कहना है कि सरकार और अधिकारी गुणवत्तापूर्ण भोजन परोसने का फरमान जारी करते हैं. हम गुणवत्तापूर्ण खाना सभी बच्चों को खिलाना चाहते हैं पर समय पर सामान की राशि नहीं मिलने से गुणवत्ता धरा का धरा रह जाता है. चूंकि उधारी में सामान खरीदने के कारण दुकानदार अपने हिसाब से सामग्री समूह को देते हैं यहीं पर हमारी गुणवत्ता फेल हो जाया करती है.

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