जांजगीर-चांपा. दो दिनों पूर्व जांजगीर के पत्रकार गोपाल शर्मा की पुत्री ईशिका शर्मा जो कि एलएलबी फाइनल ईयर की छात्रा एवं पत्रकारिता करने के साथ ही न्यूज चैनल में एंकरिंग भी करती थी की निर्मम हत्या हत्या कर दी गई. पुलिस ने दोनों आरोपियों रोहन पांडु और राजेद्र सूर्या को गिरफ्तार कर लिया है. इशिका शर्मा के माता-पिता कोरबा गए हुए थे. घर में सिर्फ इशिका शर्मा और उनके भाई आर्यन शर्मा थे. चूंकि रोहन पांडु का घर में आना-जाना लगा रहता था, इस वजह से वह भी रात में घर आया और दोनों भाई-बहन से बात करते हुए इशिका शर्मा द्वारा पहने सोने के गहने और महंगे मोबाइल उसके पास और अलमारी में रखे पैसे देखकर उसके दिमाग में लालच जाग उठा. उसके शैतानी दिमाग ने इसे लूटने की प्लानिंग बनानी शुरू कर दी.
इसके लिए उसने अपने दोस्त से बात की और उसे भी इसमें शामिल कर लिया. उसने होटल से खाना लाकर खिलाने की बात कही और होटल से खाना मंगवाकर उसमें नींद की दवाइयां पीसकर मिला दी. उसे इशिका शर्मा और उसके भाई को खाने में मिलाकर खिला दी. दोनों बहन-भाई खाना खाते ही तुरंत गहरी नींद में सो गए. तब दोनों हत्यारे मिलकर इशिका शर्मा द्वारा पहने हुए गहने निकालने लग गए, पर अचानक इशिका शर्मा की नींद खुल जाने और विरोध करने पर रोहन पांडु के साथी ने इशिका शर्मा के पैर कसकर पकड़े और रोहन पांडू ने इशिका शर्मा की गला दबाकर हत्या कर दी. इशिका शर्मा के पहने हुए गहने चैन, अंगूठी, ब्रेसलेट और घड़ी और उसके पर्स में रखे पैसे निकाल लिए और घर में रखी स्कूटी लेकर फरार हो गए.
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सहानुभूति हासिल करने जाने-अनजाने पुलिस भी दे रही साथ
एक फिल्म आई थी डर जिसमें फिल्म का विलेन बहुत ही खौफनाक तरीके से हीरोइन को परेशान करता है. इसी फिल्म के एक सीन में यही विलन हीरो के कंधे पर सिर रखकर इमोशनल तरीके से बोलता है कि मैंने प्रेम किया है, मैं हीरोइन से बहुत प्यार करता हूं. दिल के हाथों बेबस हूं और इसी एक सीन की वजह से दर्शकों की सारी सहानुभूति और समर्थन ले जाता है और दर्शकों की नजरों में हीरो से भी बड़ा हो जाता है. इशिका शर्मा की हत्या भी कुछ ऐसा ही मामला नजर आ रहा है. जिसमें हत्यारे द्वारा अपने द्वारा किए गए जघन्य हत्याकांड को जस्टिफाई करने का प्रयास किया जा रहा है, पर पुलिस द्वारा भी इसे इतना ज्यादा हाईलाइट किया जाना, प्रेस में लगातार विज्ञप्ति जारी किया जाना, एसपी द्वारा भी बार-बार प्रेम प्रसंग का मामला बताया जाना किस तरफ इशारा कर रहा है?
यह समझ से बाहर की बात है. इशिका शर्मा की हत्या का मामला साफ तौर पर डकैती, लूटपाट, हत्या का मामला है. सिर्फ हत्यारे द्वारा भावनात्मक समर्थन हासिल करने के लिए इसे प्रेम प्रसंग का रूप दिया जा रहा है. एक मृत आत्मा जो अपनी सफाई में कुछ कहने के लिए इस दुनिया में अब जिंदा नहीं है, एक लूटेरे हत्यारे के बयान को आधार बनाकर उसके ऊपर ऐसे आरोप लगाए जाना पुलिस द्वारा ऐसे बयान जारी करना सरासर अन्याय है. उसके चरित्र पर लांछन लगाए जाने जैसा है. मरने के बाद भी उसकी मिट्टी पलीत करना है, यह संपूर्ण नारी जाति पर आरोप लगाया जाना है. जिसकी हत्या हुई है हत्यारे द्वारा उसी की गलती बताई जा रही है और सहानुभूति हासिल किए जाने का प्रयास किया जा रहा है. कहीं ना कहीं पुलिस और प्रेस भी जाने-अनजाने हत्यारे की साजिश में शामिल हो रही हैं. क्या नारी जाति का बाहर निकल कर कार्य करना लोगों से मिलना जुलना अपराध है?
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मृतिका इशिका शर्मा अपने प्रोफेशन जो कि पत्रकारिता और न्यूज एंकरिंग करती थी, इस संदर्भ में उसे बहुत से लोगों से बात भी करनी पड़ती थी. फोन से भी और मिलकर भी और फील्ड में जाकर भी, तो क्या यह उसका अपराध है? क्या कोई भी किसी भी प्रकार का कार्य ना करें समाज में दुनिया में अपना एक मुकाम हासिल ना करें यहां पुलिसिया जांच पर संदेह उत्पन्न होता है. किसे फायदा पहुंचाने के लिए पुलिस द्वारा संपूर्ण जांच का केंद्र बिंदु प्रेम प्रसंग को बनाया जा रहा है और युवती द्वारा किसी अन्य से बात करने और हत्यारे को उसका किसी से बात किया जाना पसंद नहीं आने की वजह से हत्यारे द्वारा हत्या किए जाने के बयान को इतनी ज्यादा तरजीह दी जा रही है और उसे हाईलाइट किया जा रहा है. इसकी विस्तृत जांच किसी सक्षम एजेंसी द्वारा किया जाना अति आवश्यक है.







