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‘खल्लारी में फिर एक बार लोकतंत्र पर हावी हो गया राजतंत्र’

Published on: November 20, 2020
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बागबाहरा. पूर्व जनपद अध्यक्ष नरेन्द्र चन्द्राकर एवं भूखन सिन्हा सरपंच व महामंत्री भाजपा कोमाखान, मण्डल ने कहा है कि राज्य सरकार सारे नियम कानून को ताक पर रखकर अपनी मनमानी पर उतर आई है. सहकारी समितियों के पुनर्गठन में खेमड़ा, कोमाखान और कसेकेरा का विभाजन किया गया. पुनर्गठन पश्चात खेमड़ा से मोगरापाली, कोमाखान से पटपरपाली और बकमा तथा कसेकेरा से कछारडीह को नया ग्रामीण सहकारी समिति बनाया गया. इसमें सिर्फ कसेकेरा को छोड़कर सभी 6 समितियों में उस क्षेत्र के निर्वाचित प्रतिनिधियों को आगामी चुनाव होते तक कार्य करने से रोक लगाते हुए प्राधिकृत अधिकारी की नियुक्ति कर दी गई जबकि सहकारिता नियम के अनुसार नवगठित समितियों के क्षेत्रों से निर्वाचित प्रतिनिधियों को कार्यभार दिया जाना था. प्रदेश सरकार ने विगत वर्ष छत्तीसगढ़ की सभी समितियों को भंग कर दिया था.

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सरकार के उक्त हिटलरशाही रवैये के खिलाफ सभी समितियों के निर्वाचित सदस्यों ने सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने समिति के पक्ष मे फैसला दिया जिससे सरकार को मुंह की खानी पड़ी थी. खल्लारी क्षेत्र में इसके पूर्व गौठान समितियों में भी ग्राम सभा में प्रस्तावित व्यक्ति को अध्यक्ष न बनाकर लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ किया जा चुका है. पंद्रह वर्षों बाद सत्ता में आई ये सरकार अपने लोगों को पदासीन करने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों एवं लोकतंत्र का मजाक उड़ा रही है. जो निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों के साथ-साथ नियम कानून का उल्लंघन है. इसके विरुद्ध सभी समितियों के निर्वाचित जनप्रतिनिधि अपने वैधानिक अधिकारों के हनन होने पर उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करने वाले हैं. छत्तीसगढ़ सरकार ने सहकारी समिति का पुनर्गठन करने परिसीमन किया है उसमें सारे नियम कानून को ताक पर रखा है. कहीं-कहीं दो-दो गांव को समिति बना दिया गया है इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा.

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वहीं संचालक मंडल का चुनाव कराने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा चूंकि समिति के संचालक मंडल के लिए वर्गवार सदस्य नहीं मिल पाएगा तो संवैधानिक संकट खड़े होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता. उन्होने कहा कि सहकारी समिति का दायित्व ग्राम पंचायतों को आगामी चुनाव तक सौंप देना चाहिए. भविष्य में सहकारी समिति का चुनाव को ग्राम पंचायत के साथ जोड़कर निर्वाचित पंचों को संचालक मंडल का सदस्य बना दिया जाना चाहिए और पंच संख्या में से समिति अध्यक्ष का निर्वाचन कर दिया जाना चाहिए जिस समिति में जितने पंचायत शामिल है उसी पंचायतों से वर्गवार पंचों में से ही सहकारी समिति सदस्य का नाम निर्देशन कराने का प्रावधान रख दिया जाना चाहिए और उसी संचालक मंडल में से समिति अध्यक्ष का चुनाव सम्पन्न कराने का प्रावधान कर दिया जाना चाहिए.

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