बागबाहरा. गांवों में मनरेगा योजना के तहत विभिन्न काम स्वीकृत किया गया है पर पंचायतों में हो रहे कार्यों का निरीक्षण करने कोई भी सरकारी अमला नहीं पहुंच रहा है. रोजगार सहायकों के द्वारा बनाकर लाए गए मस्टररोल के आधार पर भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है. काम का मूल्यांकन और सत्यापन नहीं किया जा रहा है. उल्लेखनीय है कि रात के अंधेरे में निर्माण एजेंसी द्वारा जेसीबी से मिट्टी की खुदाई करवाई जा रही है और दिन में उसी मिट्टी को मजदूरों से बाहर करवाया जा रहा है. कुछ जगह तो मशीन से मिट्टी खुदवाकर ट्रैक्टर से फेंकवाया जा रहा है. मनरेगा में जब मशीन का उपयोग हो रहा है तो उस मशीन और ट्रैक्टर का भुगतान कहां से और कैसे किया जा रहा है.
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वहीं दूसरा पहलू यह भी है जब मजदूर काम ही नहीं कर रहे हैं तो मस्टररोल कैसे बनाए जा रहे हैं यह जांच का विषय है. जब मशीन से काम करवाया जा रहा है तो यह निश्चित है कि मजदूरों के नाम से फर्जी मस्टररोल बनवाया जा रहा है. मनरेगा में मशीनरी का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंध है तो किसके इशारे पर यह सब हो रहा है और मशीन चलाने वाले रोजगार सहायकों और सरपंचों के खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर मशीन का उपयोग क्यों किया जा रहा है इसकी तहकीकात करना भी उचित नहीं समझा जा रहा है. नाम न छापने की शर्त पर एक रोजगार सहायक ने बताया कि मनरेगा में मशीन का उपयोग करने व मशीन के एवज में मस्टररोल बनाने से उन्होने मना किया पर सरपंच और पंच उनकी बातों की अनसुनी कर मनमानी करने लगे तो मजबूर होकर उन्होने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया.
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