खरसिया. ग्यारहवें रुद्रावतार हनुमान लला के जन्म उत्सव पर चैत्रशुक्ल पूर्णिमा मंगलवार को हनुमत शक्तिपीठों में सुबह से ही भक्तों ने अपनी अर्जी लगानी शुरू कर दी. वहीं यह क्रम देर शाम तक चलता रहा. हालांकि कोरोना प्रोटोकॉल को लेकर सभी आस्था केंद्रों के पट बंद रहे, पर हनुमान मंदिरों में पहुंचकर भक्तों ने चौखट पर शीश नवाते हुए यही कामना की कि वैश्विक महामारी बन चुके कोरोना का समन करो और भक्तों की सभी पीर दूर करो. श्री रामजानकी मंदिर के सामने पहरेदार की तरह विराजमान मंशापूर्ण संकटमोचन हनुमान जी के दरबार सहित गंज बाजार स्थित हनुमान मंदिर, गीता मंदिर में विराजे मेहंदीपुर वाले हनुमान लला, तेलीकोट स्थित दक्षिणमुखी हनुमान शक्तिपीठ, परेवा पहाड़ पर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर, पुरानी बस्ती चौक पर विराजित हनुमान जी के मंदिर तथा
http://हाईकोर्ट की फटकार का असर, EC ने 2 मई को विजय जुलूस किए बैन
सभी हनुमान मंदिरों में भक्तों ने अंजनी के लाल के जन्मदिवस पर अपने इष्ट का पसंदीदा प्रसाद रोट तथा हलवा, बूंदी, फल इत्यादि अर्पित करते हुए समस्त विघ्नों का समन करने वाले हनुमान जी के मंत्रों के अलावा हनुमान चालीसा का पाठ किया. वहीं कामना की है कि पूरे विश्व में फैली महामारी को दूर करने के लिए हनुमान जी एक बार पुनः संजीवनी लेकर असाध्य बने कोरोना वायरस को नष्ट करें और सभी भक्तों सहित पूरे विश्व का कल्याण करें. संक्रमण काल को लेकर सरकारी निर्देशों को ध्यान में रखते हुए मंदिरों के पट बंद रखे गए थे. ऐसे में भक्तों ने भी मर्यादा का पालन करते हुए मंदिरों के बाहर से ही हनुमत लला को प्रसाद अर्पित किया. वहीं मंदिर प्रबंधन ने हनुमान जन्मोत्सव पर भक्तों की भीड़ नहीं होने दी. हालांकि आस्था के इस महापर्व पर मंदिरों को पुष्पों से सुसज्जित जरूर करवाया गया.







