बागबाहरा. पूर्व जनपद अध्यक्ष नरेन्द्र चंद्राकर ने कहा है कि मरवाही विधानसभा उपचुनाव में जोगी कांग्रेस के अध्यक्ष व एक विधायक श्रीमती जोगी द्वारा भाजपा को समर्थन देने से यह स्पष्ट हो गया कि वर्ष 2008 से ही जोगी कांग्रेस समर्थक को भाजपा की बी टीम कहे जाने की बात सही है. उन्होंने कहा कि अंतागढ़ उपचुनाव के समय कांग्रेस प्रत्याशी मंतूराम की खरीदी-बिक्री में जोगी कांग्रेस प्रमुख पर आरोप लगता रहा. मुख्यमंत्री रहे दबंग नेता पर ऐसा आरोप लगना ही राजनीतिक जीवन में कलंक है. छत्तीसगढ़ का राजनीतिक परिवेश किसी भी दलबदलुओं को तवज्जो देने की नहीं रही है. स्व. पवन दीवान, स्व. विद्याचरण, स्व. ताराचंद साहू और स्व.अजीत जोगी जी इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं.
राजनीतिक सुचिता के साथ वैचारिक राजनीति के लिए पूरे देश में जाने जाते, शांतिप्रिय छत्तीसगढ़ में वर्ष 2001 में भाजपा के 14 विधायक एक साथ दल बदलकर पद और पैसा के लालच में आकर पहली बार दल बदल का घिनौना खेल का प्रारंभ किए थे. यद्यपि बाद के चुनावों में हराकर उन सभी दल बदलू विधायकों को जनता ने धूल चटा दी. आज उनमें से कोई भी विधायक नहीं हैं और न ही वे सभी बाद में कोई महत्वपूर्ण पद पर निर्वाचित हो पाए. मरवाही की जनता ने बी टीम की पार्टी को तथा उनके तथाकथित नेता को चुनाव के पूर्व ही धूल चटाकर पूरे छत्तीसगढ़ में संदेश देने का काम की हैं कि अब इस राज्य में दल बदलुओं का कोई काम नहीं है जिसके लिए मरवाही की जनता धन्यवाद के पात्र हैं. श्री चंद्राकर ने कहा कि राजनीति में शत-प्रतिशत सुचिता होनी चाहिए. क्षणिक लाभ के चलते अपनी मातृ पार्टी के साथ गद्दारी करना सही नहीं है.
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उन्होने कहा कि देश, प्रदेश की राजनीति में दलबदल को रोकने ठोस कानून बनाया जाना चाहिए. यदि निजी स्वार्थ के चलते कोई भी सांसद, विधायक पार्टी छोड़ते हैं तो ऐसे नेताओं की सदस्यता समाप्ति के अलावा 6 वर्षों तक कोई चुनाव न लड़ पाए ऐसे कानून बनाया जाना चाहिए. चूंकि अपने लाभ के कारण दलबदल करते हैं बाद में पुनः उस क्षेत्र में मतदान कराया जाता है जिससे सरकारी कोष को भारी आर्थिक क्षति पहुंचती है. दलबदल करने वाले नेताओं से पूरा चुनाव खर्च वसूली भी की जानी चाहिए. यदि इस तरह कानून बना दिया जाता है तो हमेशा के लिए दलबदल जैसे घृणित कार्य को रोका जा सकता है.







