नई दिल्ली. नए साल में आम आदमी पर महंगाई की मार पड़ने वाली है. कंपनियां रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं. इससे लोगों के मासिक बजट पर फर्क पड़ सकता है. इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुतबाकि, FMCG कंपनी नेस्ले, पारले और आईटीसी का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी करने के बजाए अपने प्रोडक्ट साइज को घटा देंगी. इससे लोगों पर उतना बोझ नहीं पड़ेगा. अगर कंपनियां पैकेट का साइज छोटा नहीं करती हैं तो फिर कीमतों में बढ़ोतरी की जाएगी. दूध की कीमतों में 35 फीसदी इजाफा होने के बाद अब आटा 18 से 20 फीसदी, चीनी 14 फीसदी और खाद्य तेल 15 फीसदी महंगा हो चुका है. जनवरी से बिस्किट, नूडल्स, स्नैक नमकीन, फ्रोजन फूड, केक, साबुन और रेडी टू इट मील्स की कीमतों में इजाफा किया जा सकता है.
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कंपनियों का कहना है कि अगर कीमतें नहीं बढ़ेंगी तो फिर उनकी लागत बढ़ती जाएगी, जिससे नुकसान होगा. हालांकि कंपनियों का कहना है कि कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती से लाभ मिला है, जिसकी वजह से फिलहाल कीमतों में इजाफा नहीं किया गया है. अगर सरकार की तरफ से यह लाभ नहीं मिलता तो फिर कंपनियां अभी तक कीमतों में इजाफा हो चुका होता. कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री का कहना है कि ग्लोबल स्तर पर टेलीविजन की कीमतों में 15-17 फीसदी तक इजाफा हो चुका है. लिहाजा जब नया प्रोडक्शन जनवरी में आएगा तो कीमतों में इजाफा हो जाएगा. कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक उद्योग संगठन (CEAMA) के मुताबिक, लेवलिंग गाइडलाइंस के लागू होने से इलेक्ट्रॉनिक निर्माताओं को फाइव स्टार फ्रिज को कूलिंग के लिए पारंपरिक फोम की जगह वैक्यूम पैनल का इस्तेमाल करना पड़ेगा. इसलिए प्रोडक्ट की कीमत में करीब 6 हजार रुपए तक का इजाफा हो सकता है.










